अमर उजाला ब्यूरो
नारनौंद (हिसार)। मिर्चपुर केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह 33 लोगों को दोषी माना था। उन्हें 24 अगस्त को सजा सुनाई थी। इस मामले में आरोपियों को शनिवार को सभी को अदालत में पेश होने का समय है। शुक्रवार देर रात तक किसी भी आरोपी ने सरेंडर नहीं किया है।
दलित पिता-बेटी को जिंदा जलाने के मामले में 24 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला आया था। इसमें 33 लोगों को सजा सुनाई गई। सभी लोगों को एक सितंबर तक कोर्ट में सरेंडर करने के आदेश दिए गए थे। 31 जुलाई की रात तक किसी ने भी सरेंडर नहीं किया है। शनिवार को अदालत में इन सभी में से कोई पेश होना होगा। जस्टिस एस मुरलीधर और आईएएस मेहता की खंडपीठ ने एससी-एसटी एक्ट के तहत 58 अभियुक्तों में से 33 को दोषी माना। 12 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। 12 दोषियों को दो-दो साल और 9 दोषियों को एक-एक साल कैद की सजा सुनाई गई है। अगर इन्होंने शनिवार को दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में समर्पण नहीं किया तो गिरफ्तारी वारंट जारी होंगे। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। वाल्मीकि बस्ती की सुरक्षा में प्रशासन ने आठ सीसीटीवी कैमरे चारों तरफ लगवाए हुए हैं। इनका कंट्रोल रूम मिर्चपुर पुलिस चौकी में बनाया गया है। सीसीटीवी कैमरों की सहायता से 24 घंटे दलित बस्ती में निगरानी की जा रही है। खुफिया तंत्र भी पूरी तरह से सतर्क है।
वर्जन
सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश होना है। शनिवार तक अगर कोई पेश नहीं होता है तो कोर्ट की तरफ से जो भी आदेश होंगे, उनकी पालना की जाएगी। गांव का किसी भी कीमत पर भाईचारा खराब नहीं होने दिया जाएगा। फिलहाल गांव में पूर्ण रूप से शांति बनी हुई है।
-साधु राम, थाना प्रभारी नारनौंद
इनको होना है कोर्ट में पेश
उम्रकैद के आरोपी
राजेन्द्र, प्रदीप, जोगेंद्र उर्फ जुगल, रामफल, कुलविंद्र, पवन, कर्मवीर, धर्मवीर, संजय, सत्यवान, राजपाल, प्रदीप को कोर्ट में पेश होना है।
एक साल व दो साल सजा पाने वाले
रोशनलाल, कर्मपाल, बलवान, दयानंद, राजबीर उर्फ नन्हा, विकाश, प्रदीप, सोनू, दीपक, सत्यवान, जोखर, अमित, मोनू, सुनील, जगदीश, सत्तू, धर्मबीर आदि।
इन चार लोगों की हो चुकी मौत
रिषि, बलजीत, बोबल, बलवान आदि की मौत हो चुकी है।