अमर उजाला ब्यूरो
हांसी।
हांसी बाईपास के समीप एक भैंस चुराकर जा रहे दो चोरों को रोकना एक युवक को इस कदर महंगा पड़ गया कि उन्होंने चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद चोर भैंस को मौके पर छोड़ स्कूटी लेकर फरार हो गए। वहीं घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों का हिसार कैंट के पास एक्सीडेंट हो गया, जहां वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना में चाकू लगने से घायल हुआ गांव चदरपुल ढाणी निवासी प्रवीन को पहले हांसी के निजी अस्पताल में लाया गया, जहां से उसे हिसार रेफर किया गया। जहां उसकी मौत हो गई। वहीं घटना को अंजाम देने वाले आरोपियों को भी उपचार के लिए हिसार में भर्ती करवाया गया।
पुलिस को दिए बयान में मृतक 17 वर्षीय प्रवीन के पिता जगबीर ने बताया कि शनिवार तड़के करीब तीन बजे दो चोरों ने उनके पड़ोस से रणधीर के आवास के बाहर से एक भैंस चुरा ली। कुछ देर बाद जब भैंस मालिक को इस घटना का पता चला तो उसने ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। इसके बाद ग्रामीण चोरों की तलाश में जुट गए। जगबीर ने बताया कि इस दौरान हांसी बाईपास के समीप उन्होंने दो युवकों को भैंस ले जाते देखा। उनमें से एक युवक पैदल भैंस लेकर जा रहा था, जबकि दूसरा उसके साथ धीरे-धीरे स्कूटी चला रहा था। इस दौरान जब प्रवीन और मुकेश ने उनसे पूछा कि यह भैंस चोरी की है, तुम इसे कहां ले जा रहे हो। इस पर आरोपियों ने प्रवीन को पकड़ लिया और उनमें से एक युवक ने प्रवीन के पेट में चाकू मारा और भैंस को मौके पर छोड़कर स्कूटी पर सवार फरार हो गए।
सिविल अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे तो आरोपी आए पकड़ में
मर्डर करने के बाद भैंस चोरी करने वाले हिसार की तरफ स्कूटी लेकर भाग निकले। नशे में चूर चोरों की स्कूटी हिसार कैंट के पास फुटपाथ से टकरा गई। किसी ने घायलों को उपचार के लिए शहर के नागरिक अस्पताल में भर्ती करवा दिया। उधर से प्रवीन को निजी अस्पताल से उसका साथी मुकेश और परिवार के लोग नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे तो चाकू घोंपने वाले सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में दाखिल थे। मुकेश ने दोनों को पहचान लिया। उसने पुलिस को बता दिया कि जो युवक इलाज करवा रहे हैं, उन्होंने ही प्रवीन को चाकू मारा था। पुलिस ने दोनों को मौके से हिरासत में ले लिया। युवकों की जब तलाशी ली गई तो युवकों के पास 74 ग्राम स्मैक मिली और उनके पास 67 सौ रुपये भी मिले। पुलिस ने युवकों से पूछताछ की तो उनमें से एक ने खुद का नाम कुलदीप उर्फ मेंढक, दूसरे ने बबलू बताया ये दोनों नागरिक अस्पताल के ही पीछे अंबेडकर बस्ती के निवासी हैं।
इलाज से इनकार करने पर हो सकती है छह महीने की सजा
सामाजिक कार्यकर्ता परमानंद कटारा ने सुप्रीम कोर्ट में संविधान की धारा 32 में पीआईएल डाली थी। यह केस परमानंद कटारा वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 1989 में ऑर्डर किए थे। मामला था कि एक टू व्हीलर चालक को सड़क हादसे में इलाज नहीं मिला। डॉक्टर ने इलाज करने से इनकार कर दिया था। इस पर कोर्ट ने गाइड लाइन दी थी, जिसके तहत डॉक्टर को तुरंत चिकित्सा सहायता देनी होगी। अगर कोई डॉक्टर ऐसा नहीं करता है तो इसे सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर की अवहेलना माना जाएगा। उसके खिलाफ कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट बनती है। इसमें अगर कोई दोषी पाया जाता है तो जिसमें छह महीने की सजा हो सकती है।
- लालबहादुर खोवाल, सीनियर एडवोकेट
घटना को अंजाम देने वाले चोरों का हिसार कैंट के पास एक्सीडेंट