अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। दिल्ली हाईकोर्ट ने अप्रैल 2010 में हरियाणा के हिसार में हुए मिर्चपुर कांड में दलितों के घरों को जलाने के मामले में निचली कोर्ट के सुनाए गए फैसले को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद गांव में सन्नाटा है। गलियों में मायूसी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों ने कहा कि फैसला गांव की उम्मीदों के विपरीत है, जिससे गांव में भाईचारा कायम करने में बाधाएं उत्पन्न होंगी।
हाईकोर्ट के फैसले से पहले ही पुलिस ने अप्रिय घटना से बचने के लिए सभी तैयारियां कर ली थीं। गुप्तचर विभाग को सचेत कर दिया था। शुक्रवार को कोर्ट के फैसले से गांव में फिर मायूसी का माहौल है। हर किसी की नजर इस मामले पर अटकी हुई है। फैसले के बाद शुक्रवार को गांव की सभी गलियां सुनसान नजर आईं। मीडिया ने इस फैसले पर मिर्चपुर के लोगों से बात करनी चाही तो कैमरे के सामने कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुए। बाद में अनौपचारिक बातचीत में कहा कि इस फैसले से हमें गांव में दोबारा भाईचारा बन ने में कठिनाइयां आएंगी। अगर ग्रामीणों ने जागरूकता नहीं दिखाई तो कहीं न कहीं फिर गांव में तनाव का माहौल पैदा हो सकता है।
अब आगे अपील दायर करेंगे : धर्मबीर
मिर्चपुर मामले में पांच साल तक जेल में रह चुके धर्मवीर ने फैसले पर असंतुष्टि जताई। धर्मबीर ने कहा कि वो एक बार पांच साल की सजा काट चुके हैं। मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन इस तरह के फैसले की उम्मीद नहीं थी। अब आगे अपील दायर करेंगे
दिल्ली हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट के तहत सुनाए गए फैसले को बरकरार रखा है। इससे पहले दिल्ली की निचली अदालत ने तीन लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।
कुत्ते को डंडा मारने को लेकर हुआ था विवाद
10 अप्रैल 2010 को मिर्चपुर में एक कुत्ते को डंडा मारने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। इसके बाद कुछ लोगों ने दलित बस्ती में आग लगा दी, जिसमें 70 साल के दलित बुजुर्ग और उसकी बेटी की जिंदा जलने से मौत हो गई। इसके बाद दलितों ने गांव से पलायन कर दिया। अब वाल्मीकि बस्ती के 55 परिवार गांव में रह रहे हैं। करीब 125 से 150 के करीब परिवार हिसार के तंवर फार्म हाउस में रह रहे हैं।