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आठ माह से चल रही नकली घी बनाने की फैक्टरी पकड़ी

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हिसार। सीएम फ्लाइंग और सीआईडी की टीम ने छापा मारकर बगला रोड पर कृष्णा कॉलोनी के प्लॉट नंबर 12 में पिछले करीब आठ माह से चल रही नकली घी की फैक्टरी वेद एंड कंपनी का भंडाफोड़ किया। फैक्टरी से 400 लीटर तैयार घी और 125 लीटर कच्चा माल बरामद हुआ। फैक्टरी में श्री मधु भोग जी और सुपर मधु के नाम से दो ब्रांड बनाए जा रहे थे। छापे की भनक लगते ही फैक्टरी में मौजूद सभी कारीगर मौके से फरार हो गए, जबकि उसका मालिक फतेहाबाद के भट्टू कलां निवासी मनीष कुमार बंसल को सीएम फ्लाइंग टीम द्वारा फोन करके मौके पर बुलाया गया। वहीं देर रात स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फैक्टरी को सील कर दिया है।
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मामले के अनुसार फतेहाबाद के टोहाना में पुलिस ने नकली की से भरे 38 पीपे बरामद किए। इस दौरान पकड़े गए गाड़ी चालक से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि हिसार में बगला रोड पर फैक्टरी से वह सप्लाई लेकर आया है। इसके बाद इंस्पेक्टर विक्रम जीत के नेतृत्व में सीएम फ्लाइंग टीम और इंस्पेक्टर उमेद सिंह के नेतृत्व में सीआईडी टीम का गठन कर फैक्टरी पर छापा मारा गया। बाद में डिप्टी सीएमओ डॉ. जितेंद्र शर्मा के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम भी सैंपल लेने के लिए मौके पर पहुंची और बरामद खाद्य सामग्री के सैंपल भरे। इसके अलावा सदर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी।
ये सामान किया बरामद
टीम ने फैक्टरी से 400 लीटर तैयार घी और 125 लीटर कच्चा माल बरामद किया। इसके अलावा घी तैयार करने के लिए दो बड़े कडाहे, पैक किया हुआ घी, पैकिंग के लिए खाली डिब्बे, पैकिंग मार्का, खाली पीपे, पैकिंग मशीन, पैकिंग गत्ते सहित अन्य सामान बरामद किया।
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यूं बनाते थे नकली घी
कम लागत में अधिक मुनाफा लेने के लिए नकली घी तैयार किया जाता है। इसे मात्र 55-60 रुपये में तैयार करके 250 रुपये किलोग्राम में बेचा जाता है। पांच पीपे रिफाइंड ऑयल और 10 पीपे वनस्पति के मिलाकर इन्हें बड़े टब या कड़ाही में गर्म करके मिक्स किया जाता है। इसके बाद इसमें एसेंस (सेंट) डाला जाता है, जो देसी घी की खुशबू देता है और 15 लीटर देसी घी तैयार हो जाता है। रिफाइंड की कीमत लगभग 70 रुपये प्रति लीटर है और वनस्पति करीब 50 रुपये प्रति लीटर मिल जाता है, जबकि एसेंस करीब 2000 रुपये प्रति लीटर मिलता है। इसकी 300 मिलीलीटर की शीशी एक क्विंटल घी तैयार करने के लिए पर्याप्त होती है, क्योंकि इसकी केवल एक-दो बूंद ही डाली जाती हैं।

पूजा-पाठ व अंतिम संस्कार के लिए होता है प्रयोग
इस तरह के नकली देसी घी का कारोबार दिन-ब-दिन फल-फूल रहा है। जहां असली घी 700 से 800 रुपये प्रति किलोग्राम बिकता है, वहीं ये नकली देसी घी मार्केट में 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक में मिल जाता है। इस घी को दुकानदार ज्योत वाला घी बोलकर धड़ल्ले से बेचते हैं। यह घी अधिकतर पूजा-पाठ, हवन और अंतिम संस्कार की रस्म में प्रयोग किया जाता है।

पीपों का खरीदार मिला मौके पर
जिस समय टीम ने छापामार कार्रवाई की उस समय फैक्टरी में काम करने वाले मजदूर वहां से भाग गए थे। मौके पर एक टेंपो चालक मिला और उसका टैंपू फैक्टरी में ही खड़ा था। टेंपो खाली पीपों से लोड था। टीम ने उससे पूछा तो उसने बताया कि वह जींद का रहने वाला है और अकसर दुकानदारों से खाली पीपे लेने आता है, क्योंकि वह इन पीपों को ढक्कन लगाकर बेचने का कारोबार करता है। टीम ने उससे खाली पीपों की पूछताछ कर उस फैक्टरी से लिए गए पीपों को उतरवा लिया।

फैक्टरी के अंदर ही रहते थे मजदूर
फैक्ट्री में काम करने वालों के लिए मालिक ने एक कमरा बनाया हुआ था, जिसमें वे रहते थे। वहां उनके ऐशोआराम की सुविधा तक मुहैया कराई हुई थी। कमरे में टीवी के अलावा एसी भी लगा हुआ था। इसके अलावा वहां पर शराब की पांच बोतलें भी रखी थीं, जिनमें कुछ खाली भी थीं।

वर्जन
मैं नकली घी तैयार नहीं करता और न ही मैंने किसी पैकिंग पर देसी घी लिखा हुआ है। मेरे पास जीएसटी नंबर भी है, लेकिन लाइसेंस नहीं था। वह मुझे अभी लेना था।
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मनीष कुमार बंसल, फैक्टरी मालिक, निवासी भट्टू मंडी, फतेहाबाद।
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