अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनने के बाद दोषी अशोक की गर्दन झुकी रही, जबकि उसका पिता फैसले से 10 मिनट पहले ही अदालत से निकल चुका था। महिला विरुद्ध गंभीर अपराध स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश डॉ. पंकज ने 3:58 बजे फैसला सुनाया। पुलिस उसे 4:03 बजे कोर्ट से बाहर लेकर आई तो उसकी गर्दन झुकी हुई थी। वह मीडिया से चेहरा छिपा रहा था। जज द्वारा फैसला सुनाए जाने से ठीक 10 मिनट पहले उसका पिता सुरेश 3:48 बजे ही अदालत से निकल गया था। उसे अदालत के फैसले के बारे में आभास हो गया।
दया की लगाई गुहार, जज ने नकारा
अशोक ने दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत से कम सजा दिए जाने की गुहार लगाई। उसने इस बात का हवाला दिया कि उसकी मां को कैंसर है। अकसर बीमार रहती है और देखभाल करने वाला कोई नहीं है। उसकी बहन की मौत हो चुकी है और उसके पिता ड्यूटी के चलते बाहर रहते हैं, इसलिए उस पर दया करते हुए कम सजा दी जाए। जज ने उसकी दया की गुहार को नकारते हुए जघन्य अपराध मानते हुए अधिकतम सजा सुनाई।
भाई ने कबूला: पहले समझाया था, नहीं मानी तो पिलाया जहर
शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी भाई अशोक को गिरफ्तार कर लिया था। अशोक ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया कि उसे किरण व रोहताश द्वारा शादी करने की बात का पता चल गया था। इस पर बात करने के लिए वह 10 फरवरी की रात को किरण को ऊपर चौबारे में ले गया। वहां पर उसने किरण से पूरे मामले पर बात की और उसको समझाया कि अगर वह किसी दूसरी जाति वाले के साथ शादी करके जाएगी तो उनके परिवार की समाज में बहुत बदनामी होगी, लेकिन किरण ने उसकी बात नहीं मानी तो उसने पानी के गिलास में जहर घोलकर उसे पिला दिया। जहर पिलाने से पहले अशोक ने अपनी बहन से सुसाइड नोट भी लिखवा लिया कि वह अपनी मर्जी से जान दे रही है। जब वह मर गई तो वह उस पर रजाई डालकर नीचे आकर सो गया। सुबह घरवालों को अशोक ने बताया कि किरण ने अपनी मर्जी से जहर पीकर जान दे दी है। इसके बाद घरवालों ने बिना पोस्टमार्टम करवाए उसका अंतिम संस्कार कर दिया था।
चार दिन बाद घटना स्थल पर पहुंची थी पुलिस
किरण के पति रोहताश को जब किसी जानकार के जरिए पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है तब उसने सदर थाना में इस बात की शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने 14 फरवरी को गांव में जाकर छानबीन शुरू की। घटना की जानकारी जुटाने के लिए पुलिस ने शमशान घाट से राख व अस्थियां भी एकत्रित की थीं। इसके अलावा चौबारे के बाहर से उल्टी के सैंपल भी लिए थे। किसी भी नमूने के आधार पर पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि किरण की मौत जहर के कारण हुई। जहर देने की बात सिर्फ अशोक ने अपने बयान में दर्ज करवाई थी।
कॉलेज जाते समय हुआ था बस ड्राइवर से प्यार
किरण आईटीआई में पढ़ाई करने के लिए हररोज आदमपुर जाती थी। रोहताश भी आदमपुर-हिसार रूट पर प्राइवेट बस चलाता था। इसी दौरान दोनों में बातचीत होने लगी और दोनों में प्यार हो गया। प्यार परवान चढ़ा तो दोनों ने आपसी सहमति से 8 अगस्त 2015 को शादी कर ली, लेकिन दोनों में से इस बात का जिक्र किसी के सामने नहीं किया। किरण पढ़ाई करने के लिए जयपुर चली गई और रोहताश गुरुग्राम में कैब चलाने लगा। इस दौरान भी दोनों में फोन पर बातचीत होती रही। किरण ने रोहताश को यह बताया था कि अगर घरवालों को उनकी शादी के बारे में पता चल गया तो वह उसकी जान ले लेंगे। यह बात उसने प्रेम विवाह करवाने वाली संस्था सनातन धर्म चैरिटेबल ट्रस्ट के रजिस्टर में भी लिखी थी।
उजड़ गया परिवार, पिता पहले ही चला गया कोर्ट से
दोषी अशोक का पिता सुरेश कुमार हरियाणा पुलिस में एएसआई के पद पर रोहतक में तैनात है। इनके पास 7-8 एकड़ जमीन है, जो ठेके पर दी हुई है। फरवरी 2017 से पहले सुरेश के हंसता-खेलता परिवार था। किरण पढ़ाई के लिए जयपुर भेजा था, जबकि अशोक भी हिसार में कोचिंग ले रहा था। घटना के समय सुरेश ड्यूटी पर तैनात था और उसे बेटी की मौत की सूचना मिली, जिसके बाद वह गांव पहुंचा। चार लोगों के परिवार में लड़की की मौत हो गई, अशोक जेल में है। पत्नी को कैंसर है और सुरेश स्वयं बाहर रहता है।
जिसके साथ जीने-मरने की कसमें खाई वह बाद में गवाही से मुकर गया
जिस प्रेम विवाह की कीमत किरण को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी, वही उससे रुसवा हो गया। जीने-मरने की कसमों के साथ किरण-रोहताश विवाह के बंधन में बंधे थे, लेकिन जब किरण की मौत हो गई तो उसके लिए न्याय की लड़ाई लड़ने के बजाय रोहताश गवाही से ही मुकर गया था। रोहताश ने बाद में अदालत में बयान दिए थे कि उसने पुलिस में कोई शिकायत नहीं दी है। उसने पता कर लिया है कि उसकी पत्नी की मौत प्राकृतिक तरीके से हुई है। उसके बाद सनातन धर्म चैरिटेबल ट्रस्ट ने अदालत में यह केस लड़ा।
सनातन धर्म चैरिटेबल की मुहिम को एक बड़ी सफलता मिली है, जिसमें ऑनर किलिंग के दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है। ऑनर किलिंग की शिकार हुई युवती को न्याय दिलाने के लिए ट्रस्ट ने खुद कानूनी लड़ाई लड़ी। ट्रस्ट द्वारा इस मामले में गवाही से मुकरे मुदई मृतक किरण के पति रोहताश पर भी कार्रवाई के लिए भी अदालत से मांग की गई है।
- संजय चौहान, चेयरमैन, सनातन धर्म चैरिटेबल ट्रस्ट व जय भीम आर्मी ट्रस्ट
हमारे पास एक माह का समय है। इस केस को हाईकोर्ट में लेकर जाएंगे। हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
- एडवोकेट ललित गोयत, बचाव पक्ष के वकील