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कोर्ट ने ऑर्डर में लिखा , एसपी को खामी छोड़ने वाले पुलिस वालों पर लें एक्शन, पुलिस ने गठित की सेल

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मुकेश कुमार की अदालत ने बरवाला के सतलोक आश्रम प्रकरण के मुकदमा नंबर 426 के आरोपी रामपाल और अन्य के बरी होने पर ऑर्डर में एसपी को जांच में खामी छोड़ने वाले पुलिस कर्मचारियों पर एक्शन लेने के बारे में लिखा है। कोर्ट ने लिखा है कि पुलिसकर्मी सही गवाही और पैरवी नहीं पेश कर सके। ऐसे पुलिसकर्मियों की पहचान कर उनके खिलाफ एक्शन लें। उधर, कोर्ट की फटकार के बाद एसपी ने प्रोसीक्यूशन सेल गठित कर खामियों और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों की जांच शुरू कर दी है।
कोर्ट ने फैसले में लिखा कि गवाही के दौरान पुलिसकर्मियों ने वीडियोग्राफी की बात की, लेकिन जांच अधिकारी वीडियोग्राफी को फाइल पर नहीं लाए। यही नहीं जांच अधिकारी ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस वारंट को फाइल में नहीं लगाया, जिसको लेकर यह सब हुआ। जांच अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि उस दिन उसकी ड्यूटी कहां थी।
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एक पुलिसकर्मी ने गवाही के दौरान आरोपियों को पहचानने से इनकार किया। वहीं एक एएसआई की गवाही भ्रमित करने वाली रही। बरवाला थाना पुलिस ने सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने के इस मुकदमे में नौ पुलिसकर्मियों को गवाह बनाया था। पुलिस को कई मुकदमे चलाने के लिए संबंधित कोर्ट से अनुमति लेनी होती है। इनमें 186 आईपीसी वाले केस भी हैं। इस मुकदमे में अनुमति नहीं ली। हां खानापूर्ति के लिए एक एप्लीकेशन लगाई। उस पर भी किसी के साइन नहीं थे। कोर्ट ने इसे पुअर इंवेस्टिगेशन करार दिया है।
सब इंस्पेक्टर स्तर के दो अधिकारी करेंगे जांच
एसपी मनीषा चौधरी ने वीरवार को कार्यालय में बताया कि इस प्रकरण को देखते हुए उन्होंने प्रोसीक्यूशन सेल गठित की है। इसमें सब इंस्पेक्टर स्तर के दो अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। वे इस प्रकरण की जांच करेंगे। जांच में किसी पुलिस कर्मचारी की ड्यूटी में खामी मिली तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने स्वीकारा कि इंवेस्टिगेेशन में सुधार की जरूरत है। सेल भविष्य में मुकदमों से संबधित गवाहों और सबूतों को कोर्ट में मजबूत तरीके से प्रस्तुत कराने में सहयोग करेगी, ताकि कोर्ट में मुकदमों की पैरवी में कोई कसर न रहे और अपराधी छूट न सके।
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यह है मामला
बरवाला थाना पुलिस ने नवंबर 2014 में सतलोक आश्रम संचालक रामपाल और अन्य पर सरकारी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने और रास्ता रोककर बंधक बनाने के केस दर्ज किए थे। दोनों मुकदमों में रामपाल समेत आठ आरोपी थे। कोर्ट ने मंगलवार को दोनों मुकदमों का फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। कोर्ट ने मुकदमा नंबर 426 के फैसले में पुलिस की खामियों का जिक्र करते हुए जिम्मेवार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की बात लिखी है।

मुकदमा नंबर 426 में सही ड्यूटी नहीं देने वाले पुलिसकर्मियों पर होगी कार्रवाई
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