मिंटू गुर्जर की हत्या के बाद गांव से शहर में पलायन कर लिया था पत्नी पूनम ने
हांसी (हिसार)। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान वर्ष 2016 में हुई हिंसा के समय हांसी उपमंडल के गांव लालपुरा निवासी 23 साल के युवक मिंटू गुर्जर की हत्या के मामले में तीन साल बाद जाकर उसकी पत्नी को न्याय मिला है। इस मामले में तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। तीन साल पहले जब मिंटू की हत्या की गई थी, उस समय उसकी पत्नी पूनम की गोद में उसका चार माह का बच्चा था। मिंटू की मौत के बाद उसकी पत्नी ने गांव से पलायन कर हिसार शहर में रहना शुरू कर दिया था। अपने गम को भुलाने व बच्चे के भविष्य को देखते हुए उसने यह फैसला लिया।
पूनम ने अपने पति मिंटू को बाहर जाने से रोका भी था, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद पूनम को अपने पति की मौत की खबर ही मिली। इस हादसे के बाद पूनम के सामने बेहद कठिन परिस्थितियां थीं। एक ओर जहां पूनम को अपनी पति की मौत का गम सता रहा था, वहीं दूसरी तरफ अपने बच्चे के भविष्य को देखते हुए वह कुछ समझ ही नहीं पा रही थी।
इस फैसले के बाद पूनम ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार ने जो फैसला लिया है, वह उसके साथ है। पूनम ने यह भी कहा कि सरकार भी यह बात भलीभांति जानती है, जो उसके साथ बीती है। पूनम हिसार जीजेयू में जॉब भी करती हैं। उसके पति मिंटू की हत्या के बाद सरकार की तरफ से उसे डीसी रेट पर नौकरी दी गई है।
नहीं भूला खौफनाक मंजर : पूर्व सरपंच
गांव के पूर्व सरपंच सूबेदार ओमप्रकाश ने बताया कि जाट आरक्षण आंदोलन के समय हुई हिंसा के समय वह गांव के सरपंच थे। आज तक वह जातीय हिंसा के इस खौफनाक मंजर को भुला नहीं पाए हैं। सिसाय रोड पर गांव से तीन किलोमीटर पहले यह दर्दनाक घटना हुई थी। जब मिंटू अपने चाचा कृष्ण के साथ सिसाय रोड स्थित बुुआ शांति के मकान से सामान लेने के लिए गया था। चूंकि एक दिन पहले आवास में आगजनी हुई थी, उपद्रवियों ने गाड़ी को भी आग के हवाले कर दिया था। ऐसे में वह कृष्ण के साथ बाइक पर सवार होकर सामान लेने के लिए जा रहा था। इससे दो दिन पहले ही मिंटू के बुआ के लड़के संजय पर भी हमला हुआ था।
जान बचाने के लिए खेतों में छिप गया था मिंटू, जैसे ही बाहर निकला उपद्रवियों ने मारी गोली
मिंटू अपने चाचा के साथ सिसाय रोड स्थित बुआ के मकान में जा रहा था। इस दौरान गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर रजवाहे के पास सैकड़ों की तादाद में आए उपद्रवियों के बीच हिंसा हुई थी। मौके पर सिसाय, सैनीपुरा व ढाणी पाल के ग्रामीणों के बीच टकराव हुआ। मौके पर हुई गोलीबारी के दौरान कृष्ण व मिंटू अपनी जान बचाने के लिए खेतों में भागने लगे। हमलावरों ने उन पर गोलियां चलाईं। गोली के छर्रे कृष्ण के पेट में लगे। इसी बीच मिंटू किसी तरह मौका देखकर उपद्रवियों से बचकर खेतों में छिप गया। कुछ देर बाद उसे लगा कि उपद्रवी मौके से जा चुके हैं। जैसे ही वह बाहर निकलकर भागने लगा तो उपद्रवियों ने उस पर गोली चला दी। घटना 22 फरवरी की है। पुलिस को 23 फरवरी को मिंटू का शव ढाणी पाल के खेतों में मिला।
ढाणी के 27 घरों में मचा था लूट और आगजनी का तांडव
जाट आरक्षण आंदोलन के समय गांव ढाणी पाल में लूट और आगजनी का तांडव हुआ था। ढाणी में कुल 27 लोग ऐसे थे, जहां हिंसा के बाद मकान में कुछ नहीं बचा था। कुछ लोगों ने अपने रिश्तेदारों की शरण ली तो कुछ लोगों ने पलायन कर लिया था।
पुलिस कार्यप्रणाली पर भी उठे थे सवाल
वहीं इस हिंसा को रोकने में पुलिस भी नाकाम रही थी। उस समय पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। चूंकि पुलिस भी घटनास्थल से ज्यादा दूरी पर नहीं थी व मुख्य मार्ग पर तैनात थी, लेकिन उपद्रवी खेतों से होते हुए ढाणी में जा पहुंचे। जहां इस हिंसा ने खौफनाक रूप धारण कर लिया।