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विजिलेंस इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा पंचकूला हेडक्वार्टर भेजे

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रिश्वत मामले में फंसे इंस्पेक्टर भूपेंद्र को विजिलेंस से हटाकर पंचकूला हेडक्वार्टर भेजा
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हिसार।
40 लाख रुपये के रिश्वत केस में फंसे विजिलेंस इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा को विभाग ने फतेहाबाद विजिलेंस से हटाकर हेडक्वार्टर पंचकूला तलब कर लिया है। इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी है।
विजिलेंस डीएसपी शरीफ सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा का पंचकूला स्थानांतरण कर दिया है। विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि भूपेंद्र शर्मा को निलंबित करने के बारे में मुख्यालय में फैसला लिया जाएगा। इस बारे में अभी उनके पास कोई रिपोर्ट नहीं आई है। स्टेट विजिलेंस के डायरेक्टर जनरल पीआर देवकी और इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा को फतेहाबाद से हटाकर पंचकूला भेजने के आदेश जारी किए गए हैं। आदेश में लिखा है कि 26 अप्रैल को हिसार सिविल लाइन थाने में दर्ज एफआईआर 234 भूपेंद्र सिंह के खिलाफ दर्ज की गई है। निष्पक्ष जांच के लिए इंस्पेक्टर भूपेंद्र को विजिलेंस से हटाकर उनके मूल विभाग में पंचकूला भेजा जा रहा है। साथ ही यह भी लिखा कि भूपेंद्र सिंह विजिलेंस में पांच साल की सर्विस पूरी कर चुके हैं। उनकी डेपुटेशन पांच साल के लिए थी।
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यह है मामला
26 अप्रैल को डीएसपी सीएम फ्लाइंग वीरेंद्र सिंह की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने सेवानिवृत्त जेई मोहन लाल नारंग के अलावा, एक्सईएन विनीत चावला, सचिव प्रकाश वीर और विजिलेंस इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। रिटायर्ड जेई मोहन लाल से सात लाख रुपये बरामद किए गए थे। रिटायर्ड जेई मोहनलाल ने विजिलेंस को बताया था कि वह यह पैसा विजिलेंस इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा को देने जा रहा था।
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भूपेंद्र पर नकली सीबीआई इंस्पेक्टर बनने का केस भी हुआ था दर्ज
इंस्पेक्टर भूपेंद्र शर्मा पर दो मई 1992 को बिहार के पटना में नकली सीबीआई इंस्पेक्टर बनकर ठगने का केस भी दर्ज हुुआ था। बोकारो स्टील प्लांट के कोर्डिनेटर अशोक गुप्ता की शिकायत पर यह केस दर्ज किया गया था। मुकदमा नंबर 246/1992 पटना थने में दर्ज किया गया था। इसमें 419, 420, 467, 468, 471 धारा के तहत केस दर्ज किया गया था।
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