हिसार। शहर से खुले में घूम रहे पशु पकड़ने का महाअभियान शुरू करने से नगर निगम अपनी तैयारी कर रहा है। इसके तहत गोअभयारण्य से 1700 नंदियों को डोभी नंदीशाला में शिफ्ट किया जा रहा है। इसके अलावा गोअभयारण्य में नए शेड का भी निर्माण किया जा रहा है। निगम अधिकारियों का कहना है कि पुलिस बल मिलने पर पशुओं को पकड़ने का महाअभियान शुरू कर देंगे।
बता दें कि शहर में खुले में घूम रहे पशुओं के कारण हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है। हालांकि निगम प्रशासन निरंतर शहर से पशुओं को पकड़ रहा है। मगर इसका कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में निगम ने एक बार फिर से महाअभियान शुरू करने का फैसला किया है। महाअभियान शुरू करने से पहले निगम पूरी तैयारी कर रहा है ताकि अभियान में कोई बाधा न आए। फिलहाल गोअभयारण्य में 14 एकड़ में बनी नंदीशाला में करीब 1700 नंदी हैं। इन नंदियों को डोभी गांव में बनी नंदीशाला में भेजा रहा है। इससे नंदीशाला खाली हो जाएगी और शहर से पकड़ी जाने वाली गायों को यहां रखा जा सकेगा। यहां फिलहाल तीन शेड बने हैं और दो शेड बनाए जा रहे हैं। निगम कर्मचारियों के अनुसार यहां करीब 3 हजार गायों को रखा जा सकता है।
पुलिस बल के लिए एसपी को लिखा जा चुका है पत्र
निगम की तरफ से एसपी को पुलिस बल उपलब्ध करवाने के लिए पत्र भी लिखा जा चुका है। हालांकि अभी तक एसपी की तरफ से इस पत्र का कोई जवाब नहीं आया है। निगम ने पुलिस प्रशासन से 8 पुलिस कर्मचारी उपलब्ध करवाने की मांग की है, जिसमें एक पीसीआर व एक राइडर भी शामिल है।
एक और गाड़ी की खरीद कर रहा निगम
वर्तमान में निगम के पास पशु पकड़ने के लिए दो गाड़ियां हैं। निगम एक और ऐसी गाड़ी खरीदने की तैयारी कर रहा है। निगम अधिकारियों की मानें तो गाड़ियों की संख्या बढ़ने से पशु पकड़ने के अभियान में भी तेजी आएगी।
हादसे का शिकार पीड़ितों की कहानी, उन्हीं की जुबानी
जवाहर नगर की गली नंबर-3 निवासी रजनीश सचदेवा ने बताया कि हादसे के समय मेरे पापा की उम्र बेशक 85 वर्ष थी, लेकिन वह एक तंदरुस्त थे। यही एक वजह थी कि यहां उसके माता-पिता अकेले रह रहे थे। 30 अगस्त 2021 को जन्माष्टमी पर्व था। उस दिन सुबह पापा पास ही बने मंदिर में पुजारी के पास गए थे। वापस लौटते समय रास्ते में एक गाय ने अचानक उन्हें उठाकर पटक दिया। हादसे में उन्हें सिर में चोट आई। उस समय मैं रोहतक में था। जैसे ही मुझे हादसे की खबर मिली तो मैं तुरंत हिसार के लिए रवाना हो गया। यहां उन्हें एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। सिर में चोट के कारण दिमाग में खून के थक्के जम गए थे। हालांकि मैंने चिकित्सक से कहा कि अगर ऑपरेशन की जरूरत है तो ऑपरेशन कर दिया जाए। मगर चिकित्सक ने कहा कि ऑपरेशन का कोई फायदा नहीं होगा। आखिर में उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। रजनीश ने बताया कि उस दिन जन्माष्टमी थी। इसके बाद जब भी जन्माष्टमी का पर्व आता है तो वह दिन याद आ जाता है।
सेक्टर 4 निवासी होशियार खान ने बताया कि 4 सितंबर 2014 को लघु सचिवालय कॉलोनी में एक सांड़ ने उसे टक्कर मार थी। वह उसी सांड़ को रोटी खिलाते थे। अगर कोई उसे मारता था तो उसे भी मारने से रोकते थे। इस टक्कर से उनके दोनों हाथों में फ्रैक्चर और रीढ़ की हड्डी में चोटें आईं थीं। आज भी उनका इलाज चल रहा है। रीढ़ की हड्डी में आई चोट की वजह से अक्सर कमर में दर्द रहता है। बुधवार रात को भी सब्जी मंडी के आगे बेसहारा पशु का झुंड खड़ा था। वहां से गुजरते समय बेसहारा पशु का शिकार बनते-बनते बच गए। उस हादसे के बाद से गोवंश को देखकर बहुत डर लगने लगा है।
गोअभयारण्य से नंदियों को शिफ्ट किया जा रहा है। इनके शिफ्ट करने से खाली होनी जगह में गाय रखी जा सकेंगी। - प्रदीप हुड्डा, एएमसी, नगर निगम