हिसार। पूर्व उद्यान अधिकारी डॉ. बलजीत सिंह भ्याण ने कहा कि कीटों को कभी भी दवा से पूरी तरह से खत्म नहीं करना चाहिए। उनको प्राकृतिक तरीके से ही नियंत्रित किया जा सकेगा। प्राकृतिक तरीके से कीटों को नियंत्रित करेंगे तो हम कीटनाशकों के प्रभाव से बच सकेंगे। जहरीले कीटनाशक हमारे शरीर में नहीं पहुंचेंगे। लोगों को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों से बचा सकेंगे। प्राकृतिक तरीके से खेती कर हम मानव जीवन के लिए अपना योगदान दे सकते हैं। हर एक किसान को इसके लिए प्रेरित करें।
जाट धर्मशाला में डॉ. सुरेंद्र दलाल कीट साक्षरता मिशन के तहत आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में पांच जिलों के प्रगतिशील किसान पहुंचे। जिसमें हिसार, सिरसा, भिवानी, जींद, फतेहाबाद के प्रगतिशील किसान शामिल रहे। अपने अपने क्षेत्र में कीट पाठशाला चलाने वाले इन किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. दलाल व कीट साक्षरता मिशन के राज्य संयोजक डॉ. बलजीत ने कहा कि किसान को कीट की पहचान नहीं होती तो वह लाभकारी कीट को भी कीटनाशक का स्प्रे कर मार देता है। जिससे फसल को फायदा होने के बजाय नुकसान होता है। सबसे पहले हमें कीट की पहचान करनी चाहिए। कभी भी कीटनाशकों का प्रभाव नहीं करना चाहिए।
कीटनाशक कीट का नाश तो कर देंगे साथ ही हमारा नाश भी करेंगे। कीटनाशक का बहुत सा अंश पेड़, पौधे, मिटटी, हवा, दूध, पानी के जरिए मानव शरीर तक पहुंचेगा। जिससे कैंसर होना तय है। उन्होंने कहा कि 2008 में डॉ. सुरेंद्र दलाल ने इस मिशन की शुरुआत की थी। 2013 में उनकी मृत्यु के बाद अब दूसरे साथी उसे आगे बढ़ा रहे हैं। फिलहाल 5 जिलों में किसान पाठशाला चलाई जा रही हैं। इन पाठशालाओं को संचालित करने वाले 50 कीटाचार्य इस कार्यशाला में हिस्सा ले रहे हैं।
इन पाठशाला से प्रशिक्षण लेने के बाद पांच जिलों में करीब 6 हजार एकड़ जमीन में कीटनाशक मुक्त-जहरमुक्त खेती की जा रही है। कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में डॉ. इंद्र सिंह, सूरजभान, डॉ. धर्म सिंह, अजमेर, रमेश चंद्र ने संबोधित किया।