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Hisar News: चक दे इंडिया... संजय ने ग्रेट ब्रिटेन के 19 पास रोके, दो गोल विफल किए, पेरिस ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंची भारतीय हॉकी टीम

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डाबड़ा गांव में भारतीय हॉकी टीम की जीत पर संजय के परिजन। संवाद 
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हिसार। डाबड़ा निवासी नेकीराम की आंखों में खुशी के आंसू थे। उनकी पत्नी कौशल्या का गला रुंधा हुआ था। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे। लोग उन्हें बधाइयां दे रहे थे। मिठाई बांट रहे थे। गर्व से सबका सीना चौड़ा हो रहा था। होता भी क्यों ना। पेरिस ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली भारतीय टीम में शामिल उनके बेटे संजय कालीरावणा ने शानदार प्रदर्शन जो किया था। नेकीराम और कौशल्या ही नहीं पूरा गांव रविवार को जश्न में डूबा रहा।
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पेरिस ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्वार्टर फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन को धूल चटा दी। डाबड़ा के लाल संजय कालीरावणा ने पूरे मैच में प्रतिद्वंद्वी टीम के 19 पास रोके जबकि दो गोल विफल कर दिए। इस तरह भारत की जीत में संजय ने अहम भूमिका अदा की। बेटे के प्रदर्शन से गदगद नेकीराम ने कहा कि टीम ने जीत के लिए जीजान लगा दी। जाने से पहले बेटे ने वादा किया था कि टीम स्वर्ण पदक के साथ लौटेगी। उन्हें पूरी उम्मीद है, यह सपना जरूर पूरा होगा।
गांव में मैच देखने की पूरी तैयारी कर रखी थी। काफी संख्या में खेल प्रेमी टीवी पर नजरें गड़ाए बैठे थे। परिजनों ने जीत की कामना के लिए सुबह पूजा भी की। पेनाल्टी शूटआउट के दौरान जैसे ही भारत की ओर से पहला गोल किया गया संजय का परिवार तालियां बजाते हुए झूम उठा। पिता नेकीराम लगातार चक दे इंडिया-चक दे इंडिया कहकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते रहे।
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काफी समय तक 10 खिलाड़ियों के साथ खेली टीम
राजेंद्र सिहाग ने बताया कि दूसरे क्वार्टर में भारत के खिलाड़ी अमित रोहिदास को रेड कार्ड दे दिया गया। इस पर टीम में 10 खिलाड़ी ही खेले। बड़ी बात है कि उसके बाद भी टीम ने जीत हासिल की। अमित को रेड कार्ड मिलने के 13वें मिनट में भारत की ओर से हरमनप्रीत ने पेनाल्टी कॉर्नर से गोल कर दिया। मैच के तीसरे क्वार्टर में ब्रिटेन ने 41वें मिनट में गोल कर मैच बराबरी पर ला दिया। बाद में पेनाल्टी शूटआउट से टीम को जीत मिली।
बेटे पर गर्व, देश का नाम करेगा रोशन
मुझे बेटे पर गर्व है। खुशी की बात है कि आज टीम सेमीफाइनल में पहुंच गई है। बेटे ने ग्रामीणों से स्वर्ण पदक जीतने का वादा किया है। संजय अपनी उम्मीदों पर खरा उतरेगा। परिवार व गांव में खुशी का माहौल है। - कौशल्या देवी, संजय की मां
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