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Nanital Accident: खुशियों की तलाश में गए थे, कभी न भूलने वाला दर्द लेकर आए

Mon, 09 Oct 2023 10:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हल्द्वानी/हिसार (हरियाणा)

सार

एकदम से ड्राइवर चिल्लाया मैम बस नीचे जा रही है। यह सुन बस में चीख-पुकार मच गई और अगले ही पल बस खाई में गिर गई थी।
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नैनीताल में खाई में गिरी बस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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नैनीताल-कालाढूंगी रोड पर रविवार की देर शाम हुए हादसे के घायल अब भी दहशत में है। खुशियों की तलाश में परिवार संग नैनीताल घूमने आए थे और कभी न भूलने वाला दर्द लेकर वे लोग लौटे हैं। सोमवार को घायलों ने आपबीती सुनाई। बताया कि हादसा अचानक ही हो गया। कुछ समझ नहीं आया।

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हिसार की रहने वाली प्रियंका न्यू मानव इंटरनेशनल स्कूल आर्यनगर में टीचर हैं। उनकी दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो गई हैं। उन्होंने बताया कि सब हंसी-खुशी नैनीताल गए थे। इससे पहले भी टूर पर जाते रहते थे। हालांकि वह पहली बार स्कूल स्टाफ के टूर में आई थीं। बताया कि झील में सबने बोटिंग की। जू देखा और खूब घूमे। कहा कि नैनीताल की सुंदरता देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं लेकिन उन्हें नहीं पता था कि खुशी के ये पल कुछ ही घंटे बाद मातम में बदलने वाले हैं। बताया कि वह ड्राइवर के पास बैठीं थीं। शाम को करीब 6.15 बजे बस नैनीताल से कालाढूंगी की ओर जा रही थी। तभी एकदम से ड्राइवर चिल्लाया मैम बस नीचे जा रही है। यह सुन बस में चीख-पुकार मच गई और अगले ही पल बस खाई में गिर गई।

आवाज दी तो लोगों ने ढूंढा और बचाया
प्रियंका ने बताया कि वह अपनी साथी और ड्राइवर के साथ खाई में बहुत नीचे गिर गईं थीं। जब लोग घायलों को बचाने के लिए पहुंचे तो उन्हें ढूंढ नहीं पा रहे थे। इसलिए प्रियंका ने किसी तरह आवाज दी, जिससे पता चला कि खाई में और नीचे भी लोग हैं। बताया कि अब तो याद भी नहीं है कि कैसे आवाज निकली।
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पेड़ नहीं होता तो और नीचे जाती बस
150 मीटर नीचे गिरने के बाद बस एक पेड़ से टकराकर रुक गई। अगर पेड़ नहीं होता तो बस बहुत नीचे तक खाई में जाती। अगर ऐसा होता हो संभवत: मृतकों की संख्या और भी बढ़ जाती।

मसीहा बनकर आए इंद्र, अब लंबे समय तक रहेंगे बिस्तर पर
इंद्र कोरंगा नैनीताल के एक होटल में नौकरी करते हैं। वह पेशे से इलेक्ट्रीशियन हैं। बताया कि वह नौकरी से शाम को घर पहुंचे ही थे और टीवी पर इंडिया और ऑस्ट्रेलिया का क्रिकेट मैच देख रहे थे। घटनास्थल के पास ही उनका घर है। जैसे ही पता चला कि वह लोगों को बचाने के लिए दौड़ पड़ा। इंद्र ने बताया कि शुरू में स्थानीय लोग और पास की पुलिस चौकी के ही लोग थे। जब तक और टीम आई तब तक वे करीब 12 लोगों को खाई से निकाल चुके थे। बताया कि एक घायल को निकालने के लिए स्ट्रेचर पकड़कर ऊपर ला रहे थे और रस्सी का सहारा लिया था लेकिन तभी ऊपर से पत्थर आ गया और पैर पर लग गया। इंद्र का कहना है कि डॉक्टर के अनुसार उन्हें अब करीब एक साल तक बिस्तर पर रहना है। हालांकि जब इंद्र के जज्बे की सूचना लोगों का मिली तो लोगों ने उनकी प्रशंसा की। अस्पताल में आए अधिकारियों ने भी इंद्र की सराहना की।

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