हिसार। करीब तीन साल पहले जिस बेटी को जन्म देने वालों ने ही लावारिस हाल में छोड़ दिया था, अब उसके नए मां-बाप मिल गए हैं। अमेरिका में रहने वाले इस अप्रवासी भारतीय दंपती ने बेटी का पालन-पोषण राजकुमारी की तरह करने का वादा किया है। वे बेटी को गोद लेंगे, जिसके लिए जरूरी औपचारिकता पूरी हो गई हैं। बिटिया का पासपोर्ट बनते ही दंपती अपने साथ ले जाएगा। फिलहाल अनाथ आश्रम में रह रही बेटी मम्मी-डैडी के साथ जाने को तैयार है।
अब पांच साल की हो चुकी इस बेटी को बाजार में लावारिस हाल में पाया गया था। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर उसे अनाथ आश्रम में रखा गया। जन्म देने वाली मां ने तो उसे भुला दिया, लेकिन किस्मत की धनी इस बेटी को जल्दी ही नए मां-बाप के दर्शन हो गए। अनाथ आश्रम में आने के कुछ ही दिन बाद अमेरिका में रहने वाले एक अप्रवासी दंपती ने इसे गोद लेने की इच्छा जताई। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया। बाल भवन हिसार के प्रबंधक मोतीलाल बताते हैं कि अप्रवासी दंपती करीब तीन महीना पहले बिटिया से मिलने आए थे। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने आए इस दंपती ने बेटी से मुलाकात की थी। नि:संतान दंपती ने बेटी को अपनी किस्मत का सितारा बताते हुए खूब दुलार किया था। बेटी भी उनसे पहली मुलाकात में ही काफी घुल मिल गई थी। इस गोद देने से संबंधित सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। केवल बेटी का पासपोर्ट बनना बाकी रह गया है। जैसे ही पासपोर्ट बनेगा, दंपती भारत आकर बेटी को अपने साथ ले जाएगा।
करीब ढाई साल लगे प्रक्रिया पूरी होने में
अनाथ आश्रम से बच्चों को गोद लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसके बाद आए आवेदनों की जांच व पात्र लोगों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कराई जाती है। इसमें आवेदक की सामाजिक व आर्थिक स्थिति, वैवाहिक स्थिति आदि से संबंधित जांच भी शामिल होती है। बच्चा जिस दंपती को गोद दिया जाता है, उनकी औसत आयु के आधार पर ही यह तय होता है कि किस उम्र के बच्चे इन्हें गोद दिए जा सकते हैं। बिटिया को गोद लेने वाले दंपती ने भी करीब ढाई साल पहले आवेदन किया था। जांच की प्रक्रिया व सत्यापन अब जाकर पूरा हुआ है। बिटिया जिस दिन दंपती के साथ जाएगी, उस तारीख से अगले दो साल तक उसकी निगरानी भी होगी। जरूरत पड़ने पर अफसर घर जाकर यह पता करेंगे कि वहां बेटी सुखी व सुरक्षित है अथवा नहीं।
सात साल में 45 बच्चे दिए गए गोद
हिसार के बाल भवन में संचालित अनाथ आश्रम में वर्ष 2015 से लेकर अब तक 45 बच्चों को गोद दिया जा चुका है। बाल कल्याण अधिकारी विनोद कुमार के अनुसार गोद दिए गए सभी बच्चे नए माहौल में सुखी हैं और उनका पालन-पोषण बेहतर ढंग से हो रहा है। गोद दिए गए बच्चों में अधिकांश बेटियां ही हैं।