एचएयू के तिलहन वैज्ञानिकों की टीम कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज के साथ।
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) को सरसों अनुसंधान एवं विकास कार्यों में बेहतर योगदान देने के लिए सर्वश्रेष्ठ केंद्र अवाॅर्ड से नवाजा गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने बताया कि यह अवॉर्ड राया-सरसों अनुसंधान निदेशालय द्वारा जम्मू में आयोजित अखिल भारतीय राया एवं सरसों अनुसंधान कार्यकर्ताओं की वार्षिक बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (तिलहन व दाल) डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने प्रदान किया।
कुलपति प्रो. कांबोज ने बताया कि विश्वविद्यालय के तिलहन वैज्ञानिकों की टीम ने हाल ही में सरसों की आरएच 1424 व आरएच 1706 नामक दो नई उन्नत किस्में विकसित की हैं। पैदावार व तेल की मात्रा में ये दोनों किस्में बहुत बेहतरीन हैं, जो सरसों उगाने वाले राज्यों में तिलहन उत्पादकता बढ़ाने में बहुत सहायक होगी। उन्होंने इस उपलब्धि पर तिलहन वैज्ञानिक डॉ. राम अवतार सहित उनकी टीम को बधाई दी। अनुसंधान निदेशक डॉ. जीतराम शर्मा ने उम्मीद जताई कि सरसों की यह नई किस्में अपनी विशिष्ट विशेषताओं के कारण सरसों उत्पादक राज्यों में बहुत लोकप्रिय होंगी।
सरसों की अब तक 21 किस्में की विकसित
कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एसके पाहुजा ने बताया कि सरसों अनुभाग के वैज्ञानिकों की टीम अब तक राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर 21 किस्में विकसित कर चुकी है। वर्ष 2018 में विकसित की गई किस्म आरएच 725 हरियाणा के अलावा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली व बिहार राज्यों में बहुत लोकप्रिय है, जिसकी किसान 25-30 मण प्रति एकड़ आसानी से उपज प्राप्त कर रहे हैं।