हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कृषि महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय कृषि अधिकारी कार्यशाला (खरीफ) 2024 का समापन हुआ। खरीफ फसलों की पैदावार बढ़ाने और उनको बीमारियों से बचाने वाली कृषि सिफारिशों को अंतिम रूप दिया। इस दौरान एचएयू की मूंग की किस्म एमएच 1762, ज्वार की सीएसवी 53 एफ, एचजे 1514, एचजेएच 1513 समेत 11 फसलों की सिफारिशें की गई। मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज रहे।
कुलपति ने कहा कि कृषि अधिकारी एवं विस्तार शिक्षा विशेषज्ञ समग्र सिफारिशों को जल्दी से जल्दी किसानों तक पहुंचाएं ताकि आगामी खरीफ सीजन में उन्हें लागू करा सकें। उन्होंने ज्वार व बाजरा में बीज उत्पादन में आने वाली समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर की बीज उत्पादन कंपनियां इन फसलों का बीज उत्पादन अन्य राज्यों भी कर सकते हैं। फसलों में पक्षियों के नुकसान से निपटने के लिए बड़े क्षेत्र में उगाना जरूरी है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशील, कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली व कम उपजाऊ भूमि में अच्छा प्रदर्शन करने वाली किस्मों पर और अधिक काम करने की आवश्यकता बताई। हाल ही में विकसित सरसों की आरएच 725 किस्म के बीमारियों व विपरीत परिस्थितियों में अच्छे प्रदर्शन के फीडबैक को सभी से साझा किया। इस मौके पर अतिरिक्त निदेशक, कृषि व किसान कल्याण विभाग, हरियाणा डॉ. रोहताश राड़, क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग एवं कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ के वरिष्ठ संयोजक डॉ. रमेश यादव मौजूद रहे।
कार्यशाला में खरीफ की फसलों पर सिफारिशें स्वीकृत की गईं
1 मूंग की किस्म एमएच 1762 की सिफारिशें स्वीकृत की गईं
2 चारे वाली ज्वार की सीएसवी 53 एफ की सिफारिशें स्वीकृत की गईं
3 ज्वार की एचजे 1514 की सिफारिशें स्वीकृत की गईं
4 चारे वाली ज्वार की एक हाईब्रिड किस्म एचजेएच 1513 को खरीफ फसल के लिए स्वीकृत किया।
5 कपास की फसल में टपका सिंचाई की समय-सारिणी की सिफारिश।
6 जलवायु परिवर्तन के परिपेक्ष्य में एक हैक्टेयर के लिए समेकित कृषि प्रणाली मॉडल की सिफारिश।
7 खरीफ सीजन में मक्का को चारे की फसल के रूप में उगाने हेतु समग्र सिफारिश।
8 सीधी बिजाई वाले धान में खरपतवार नियंत्रण के लिए पिनोक्सूलम 1 प्रतिशत +पेंडिमेथलीन 24 प्रतिशत ,1000 मिली प्रति एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में घोल बनाकर बिजाई के 0 से 3 दिन बाद छिड़काव करें।
9 धान की फसल में फुटाव व उपज बढ़ाने के लिए 4 किलोग्राम माइकोराइजा की तीन बराबर विभाजित खुराक को रोपाई के 15 दिन बाद, फुटाव और बालियों की अवस्था पर प्रति एकड़ की दर से छींटा विधि से छिड़काव करें।
10धान की सीधी बिजाई में तना छेदक कीट नियंत्रण के लिए 6 मिली, क्लोरेनट्रेनिलीप्रोल 50 प्रतिशत एफएस को पानी में मिलाकर 25 मिली. घोल को प्रति किलो बीज की दर से उपचार करने के बाद छाया में सूखाकर बिजाई करें।
11 मक्के की फसल में धारीदार पर्ण एवं पर्णच्छद अंगमारी रोग के नियंत्रण को प्रभावी बनाने के लिए 30-35 दिन पुरानी फसल में पौधों की निचली 2-3 पत्तियों को तोड़ने की सिफारिश।