हरियाणा में राइट टू रिकॉल व ई-टेंडरिंग के खिलाफ और पंचायतों को पूरे अधिकार देने की मांग को लेकर आंदोलनरत सरपंचों ने सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। सरपंचों ने ब्लॉक कार्यालयों से धरने उठाकर प्रदेश के भाजपा, जजपा व निर्दलीय विधायकों के आवासों पर धरने देने सहित कई फैसले लिए हैं।
सरपंच एसोसिएशन की राज्य कमेटी की बैठक रविवार को गांव गंगवा के ग्राम सचिवालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता बाढड़ा ब्लॉक प्रधान रामचंद्र श्योराण एवं हिसार जिला प्रधान नरसिंह दुहन ने की। बैठक में एसोसिएशन के राज्य प्रधान रणबीर सिंह समैण, उप प्रधान संतोष बेनीवाल, सेवानिवृत्त आईजी रणबीर शर्मा आदि शामिल रहे। बैठक में 25 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया।
सरकार के समक्ष रखीं ये मांगें
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सरपंचों ने कहा कि हमारी मांग को जनता के बीच लेकर जाएंगे और सरकार की पोल खोलेंगे। उन्होंने संविधान के 73वें संशोधन की 11वीं सूची के 29 नियम पूर्ण रूप से लागू करने, राइट टू रिकॉल विधायक, सांसद व मुख्यमंत्री पर भी लागू करने, ई-टेंडरिंग पूर्ण रूप से बंद करना, फैमिली आईडी पूर्ण रूप से बंद करने, काटे गए सभी बीपीएल दोबारा बनाने, 9 हजार बिजली की वजह से राशनकार्ड काटने की शर्त वापस लेने, मनरेगा की मजदूरी 600 रुपये करना और सरपंचों का मानदेय 30 हजार व पंचों का मानदेय पांच हजार रुपये करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सभी सरपंच सरकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम का बहिष्कार करेंगे।
जब तक प्रदेश के भाजपा, जजपा व सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक सरपंचों का समर्थन नहीं करते, तब तक उनके आवासों पर धरने दिए जाएंगे। इस अवसर पर सरपंचों ने एक आईटी सेल भी गठित की ताकि जनता तक अपनी बात आसानी से पहुंचाई जा सके।
सरपंच एसोसिएशन के हिसार जिला कोषाध्यक्ष आजाद सिंह हिन्दुस्तानी ने बताया कि प्रदेश स्तरीय बैठक में लिए गए फैसलों को सभी सरपंच जोर-शोर से अमलीजामा पहनाएंगे। सरपंच अपने आंदोलन से किसी तरह पीछे नहीं हटेंगे और सरकार की मनमानी व तानाशाही का पुरजोर जवाब देंगे।