इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग की टीम भी इमरजेंसी कक्ष में अलर्ट रही। जिले में की गई आतिशबाजी में 6 लोग झुलसे। इनमें एक पिता और उसके दो पुत्रों समेत तीन अन्य लोग हैं। खास बात ये रही कहीं भी आग लगने का मामला दमकल विभाग के संज्ञान में नहीं आया।
- ये 6 लोग आतिशबाजी से झुलसे, तीन को रोहतक पीजीआई रेफर करना पड़ा
शहर निवासी संतोष (32) समेत उसके बेटे सौरभ (11) व संदीप (14) आतिशबाजी में झुलस गए। उन तीनों को सिविल अस्पताल से रोहतक पीजीआई रेफर किया गया। इसके अलावा दादरी निवासी मनजीत, पैंतावास निवासी विजय पुत्र दीपक और रूदड़ोल निवासी केशा (12) भी पटाखे जलाते समय झुलसने से उपचार करवाने सिविल अस्पताल पहुंचे।
जानिये... किस विभाग ने क्या की थी व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग : इमरजेंसी केस के लिए सिविल अस्पताल में 30 कर्मचारी तैनात रहे। इनमें मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, एंबुलेंस चालक और ईएमटी शामिल हैं। हालांकि रविवार को कोई इमरजेंसी केस यहां नहीं आया, लेकिन फिर भी स्टाफ ड्यूटी पर तैनात रहा।
पुलिस विभाग : पुलिस विभाग कंट्रोल रूम के फोन दिवाली के दिन दिनभर घनघनाते रहे। अपराध की रोकथाम के लिए 59 टीमें अलर्ट रहीं, लेकिन फिर भी कुछ जगहों से हिंसा और झगड़ों की शिकायतें पुलिस के पास पहुंची। इनमें से कंट्रोल रूम में 53 लोगों ने कॉल कर मदद मांगी।
दमकल विभाग : राहत की बात ये रही कि दिवाली पर जिले में किसी भी जगह आग लगने की सूचना दमकल विभाग के पास नहीं पहुंची। 23 कर्मचारियों में से 16 की तैनाती दादरी में और 7 की बाढड़ा में रही। एक भी आग की घटना नहीं हुई और इसकी पुष्टि दमकल अफसर सचिन कुमार ने की।