हिसार। गोवंश के लिए मुसीबत बनी लंपी बीमारी का कहर थमने लगा है। पशु चिकित्सक इसे टीकाकरण का प्रभाव मान रहे हैं। एक अक्तूबर से अब तक पशुपालन विभाग के रिकॉर्ड में एक भी नया केस दर्ज नहीं हुआ है। वहीं जुलाई से सितंबर के बीच जिले में 2502 पशु इस रोग की चपेट में आए, जिसमें से 92 की मौत हुई। 2410 पशु इलाज के बाद स्वस्थ हो चुके हैं।
संक्रामक बीमारी लंपी का पहला मामला जुलाई में अग्रोहा की एक गोशाला में मिला था। उमस भरी गर्मी व बारिश के दौरान बीमारी तेजी से फैली और अगस्त का महीना गोवंश के लिए कष्टकारी हो गया। बीमारी के बढ़ते कहर को देखते हुए शासन ने गोट पॉक्स बीमारी के लिए बनी वैक्सीन को ही गोवंश को लगाने की अनुमति दी। इसके बाद अभियान चलाकर गोवंश का टीकाकरण किया गया। पशुपालन विभाग ने 15 दिन में एक लाख 62 हजार गोवंश का टीकाकरण कराया। पशुपालकों की मानें तो मौसम में बदलाव के साथ ही बीमारी का प्रभाव भी कम दिखने लगा। सितंबर के अंतिम सप्ताह में ही केस तेजी से कम होने लगे। पशुपालन विभाग के आंकड़े भी बता रहे हैं कि मौसम में बदलाव हो या फिर टीकाकरण, लेकिन अक्तूबर में केस आने बंद हो गए हैं।
हांसी के एसडीओ डॉ. सुधीर मलिक ने बताया कि लंपी की रोकथाम में टीकाकरण सबसे अहम साबित हुआ। स्वस्थ पशुओं का शीघ्रता से टीकाकरण किया गया, जिससे वे पशु संक्रमित होने से बच गए। एक बार संक्रमण की चेन टूटी तो बीमारी की रोकथाम आसान हो गई। करीब 15 दिन से एक भी नए केस की सूचना नहीं है।
लंपी का अभी लक्षण के आधार पर ही उपचार होता है, ऐसे में टीकाकरण ही सबसे बेहतर विकल्प है। बीमारी की रोकथाम के लिए बने टीके लंपी प्रोवैक आईएनडी का जल्दी ही प्राइवेट कंपनी उत्पादन शुरू करेगी। इस बीमारी ने गोवंशों को काफी प्रभावित किया है। लंपी की रोकथाम के लिए बना टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। - डॉ. नवीन, लंपी प्रोवैक आईएनडी के अनुसंधानकर्ता
30 सितंबर तक लंपी का आंकड़ा
बीमार पशु ठीक हुए मौत
गांव 1963 1875 88
गोशाला 539 535 04