हिसार। हेपिटाइटिस बी और सी (काला पीलिया) लीवर का दुश्मन माना जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिले में लगातार इसके मरीज बढ़ रहे हैं। नागरिक अस्पताल में पहले जहां साल में 500 मरीज उपचार के लिए आते थे , अब हर महीने 100 मरीज हेपेटाइटिस के सामने आ रहे हैं। इन 100 मरीजों में ज्यादा संख्या उनकी हैं जो नशा करते हैं। अब नशा करने वालों की हेपेटाइटिस जांच करवाई जा रही है जिस कारण मामले बढ़ रहे हैं। नागरिक अस्पताल में मंगलवार और शुक्रवार को हेपेटाइटिस मरीजों के लिए स्पेशल ओपीडी होती है और दवा भी मुफ्त दी जाती है। हेपेटाइटिस के बारे में जागरूकता और लोगों को शीघ्र निदान, रोकथाम व हेपेटाइटिस के उपचार को प्रोत्साहित करने के लिए हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस (काला पीलिया) दिवस मनाया जाता है।
चार प्रकार का होता है हेपेटाइटिस
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन रामअवतार ने बताया कि हेपेटाइटिस चार प्रकार का होता है। हेपेटाइटिस ए और ई यह पीलिया खतरनाक नहीं है। साफ पानी और स्वच्छ खाना न खाने के कारण यह होता है। आमतौर पर बारिश के मौसम में यह बीमारी फैलती है। इसमें आंखें पीली हो जाती है जिससे पता चल पता है कि मरीज को पीलिया है और दवा लेने के बाद ठीक हो जाता है।
हेपेटाइटिस बी और सी है। हेपेटाइटिस बी (काला पीलिया) खतरनाक बीमारी है। अगर, समय पर इसका उपचार नहीं मिला तो मरीज की मौत भी हो सकती है। इसमें मरीज को समय पर उपचार मिल जाए तो तीन से छह महीने तक इसकी दवा चलती है और मरीज ठीक हो जाता है।
नागरिक अस्पताल में टेस्ट व दवा मिलेगी मुफ्त
फिजिशियन रामअवतार ने बताया कि नागरिक अस्पताल में इसी साल से काला पीलिया का टेस्ट और उपचार शुरू हुआ है। इसका टेस्ट और दवाइयां काफी मंहगी है। नागरिक अस्पताल में मरीजों का टेस्ट और दवाइयां मुफ्त में मिलती है। वैसे तो हर रोज मरीजों की जांच की जाती है लेकिन, मंगलवार और शुक्रवार को विशेष क्लीनिक लगता है। मार्च महीने से हर महीने करीब 100 मरीज हेपेटाइटिस के सामने आ रहे हैं। इसका कारण ये भी है कि जो नशा छोड़ने के लिए आ रहे हैं उनका टेस्ट करवाया जा रहा है और अधिकतर काला पीलिया से ग्रस्त मिल रहे हैं।
यह है हेपेटाइटिस बी
हेपेटाइटिस बी अत्यधिक संक्रामक रोग है। जिसका मतलब है कि यह संक्रमित रक्त और कुछ अन्य शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क के माध्यम से फैलता है। इसके अलावा बीमार के साथ शारीरिक संबंध बनाने से सबसे जल्दी फैलता है। हेपेटाइटिस बी का वायरस लार में पाया जा सकता है, पर यह एक ही बर्तन में खाना खाने से नहीं फैलता है। यह छींकने, खांसने, या स्तनपान (ब्रेस्ट फीडिंग) से भी नहीं फैलता है। इसका संक्रमण शरीर के बाहर सात दिनों तक जीवित रह सकता है।
ये हैं लक्षण और बचाव
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, भूख कम लगना, बुखार आना, त्वचा और आंखों का पीला होना, मूत्र का रंग गहरा पीला हो जाना, अत्यधिक थकान, उल्टी आना मुख्य लक्षण हैं। वहीं हेपेटाइटिस से बचाव रखने के लिए टूथब्रश किसी से शेयर न करें, टैटू बनवाते समय उपकरणों को सैनिटाइज कराएं, असुरक्षित संभोग से परहेज बरतें, बीमारी के लक्षण दिखें तो इलाज कराएं।