हरियाणा में हुए जिला परिषद चुनाव ने सभी राजनीतिक दलों को खुश होने का मौका दे दिया है। ज्यादातर राजनीतिक दल, इस चुनाव को खुद के लिए बढ़त वाला बता रहे हैं। वजह, कई दलों ने 22 जिला परिषदों की सभी 411 सीटों पर पार्टी सिंबल के साथ चुनाव नहीं लड़ा है। कांग्रेस पार्टी, ने एक भी सीट पर सिंबल से चुनाव नहीं लड़ा। बाकी दलों को जहां अपना फायदा दिखा, वहां सिंबल पर उम्मीदवार खड़े कर दिए। अब ज्यादातर सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुए हैं। निर्दलीय प्रत्याशी ही तय करेंगे कि जिला परिषदों को 'ट्रिपल इंजन' वाला दल चाहिए या कोई सिंगल पार्टी। भाजपा को उम्मीद है कि प्रदेश में ज्यादातर जिला परिषद चेयरमैन 'कमल' वाले होंगे।
दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी है, जिसके पास अभी तक कोई आधिकारिक विजेता प्रत्याशी नहीं है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा कहते हैं, भाजपा, जजपा, इनेलो, आप व बीएसपी मिलकर भी 13 फीसदी पार्षद ही जिता सकी हैं। जिला परिषद चुनाव में लगभग 87 फीसदी वोट निर्दलीय पार्षदों को मिले हैं। इनमें अधिकांश जिला पार्षद कांग्रेस विचारधारा के हैं।
खाता तो सभी दलों का खुला है…
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, प्रदेश में जिला परिषद चुनाव को किसी दल के लिए न तो ज्यादा उत्साहवर्धक कहा जा सकता है और न ही नुकसानदायक। खाता तो सभी दलों का खुला है। ये अलग बात है कि कांग्रेस पार्टी ने एक भी सीट पर अपना आधिकारिक उम्मीदवार खड़ा नहीं किया था। हरियाणा की राजनीति को समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र कुमार बताते हैं, देखिये जिला परिषद के नतीजों को विधानसभा या लोकसभा चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। प्रदेश में अभी विधानसभा चुनाव दूर हैं। 2024 में पहले लोकसभा चुनाव होगा और उसके चार-पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव होंगे। तब तक प्रदेश के राजनीतिक माहौल में कई तरह के बदलाव संभव हैं।
भाजपा ने 300 विजयी प्रत्याशियों पर किया अपना दावा...
भाजपा ने सात जिलों में ही सिंबल पर चुनाव लड़ा है। तकरीबन 100 से अधिक सीटों पर भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार मैदान में उतरे थे। 22 सीटों पर जीत हासिल हुई है। आप ने 111 सीटों पर चुनाव लड़ा और 14 सीटों पर जीत दर्ज की है। इनेलो ने जिला परिषद की 72 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उसे भी 14 सीटों पर जीत मिली है। इसी तरह जजपा भी दावा कर रही है कि 100 से ज्यादा सीटों पर उसके समर्थित उम्मीदवार जीते हैं। जीत हासिल करने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों पर सभी दल अपना दावा कर रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ता संजय शर्मा कहते हैं, भाजपा समर्थित 150 से ज्यादा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज कराई है। इतना ही नहीं, शर्मा ने 126 निर्दलीय विजयी उम्मीदवार को भी अपना ही बताया है। ऐसे में भाजपा 22 जिला परिषदों के कुल 411 सदस्यों में से 300 विजयी प्रत्याशियों पर अपना दावा कर रही है। ऐसे में यह स्पष्ट तौर से नहीं कहा जा सकता है कि किस पार्टी को जिला परिषद चुनाव में बहुमत हासिल हुआ है।
87 फीसदी लोगों के वोटों को अपना बता रही कांग्रेस...
चुनाव परिणाम आने के बाद कई दलों ने अपने तरीके से मीडिया में खुद की स्थिति पेश की। जैसे भाजपा ने खुद को पहले नंबर पर बताया। आप नेताओं ने कहा, जिला परिषद चुनाव में वे दूसरे नंबर पर हैं। तीसरे नंबर पर इनेलो आ गई। ऐसे में कांग्रेस पार्टी को विचित्र स्थिति का सामना करना पड़ा। मीडिया में जारी हुई चुनाव परिणाम की तालिका में कांग्रेस के कॉलम में आगे जीरो लिखा गया। इसके बाद सोमवार शाम को कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा, जिला परिषद चुनाव में लोगों ने भाजपा और जजपा को नकार दिया है। 87 फीसदी लोगों ने निर्दलीय व कांग्रेस विचारधारा के उम्मीदवारों को वोट दिया है। भाजपा को महज पांच फीसदी वोट मिले हैं। इनेलो व आप को तीन फीसदी वोट और बसपा को दो फीसदी वोटों से संतुष्ट करना पड़ा। भाजपा को पूरे प्रदेश में हर सीट पर उनकी पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार ही नहीं मिले। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, जिला परिषद में सबसे ज्यादा कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार विजयी हुए हैं। भाजपा व जजपा को सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। लोगों ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है।
भाजपा का 'ट्रिपल इंजन' पर दांव
रविंद्र कुमार ने कहा, जब सभी दलों ने अपने सिंबल पर चुनाव ही नहीं लड़ा है, तो ऐसे में किसी के लाभ या नुकसान की बात करना ठीक नहीं है। सभी दल अपने तरीके से विजयी हुए निर्दलीय उम्मीदवारों को भुना रहे हैं। अब सारी लड़ाई जिला परिषद के चेयरमैन बनाने की है। जिस किसी पार्टी के पाले में ज्यादा चेयरमैन होंगे, उसका दबदबा रहेगा। आमतौर पर जिस दल की सरकार होती है, चेयरमैन पद के लिए उसका दावा बढ़ जाता है। कुछ लोग यह कह सकते हैं कि गांवों में भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी है। यह तो पहले से ही शहरी वर्ग के लोगों की पार्टी रही है। अब जिला परिषद के चेयरमैन ही सत्ताधारी पार्टी का वजूद साबित करेंगे। भाजपा का यह प्रयास रहेगा कि वह चुनावी नतीजों की हल्की फुल्की मायूसी को पंचायत समिति और जिला परिषद के चेयरमैन पद के चुनाव में जीत दर्ज कराने से काउंटर कर सकती है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जिला परिषद में 'ट्रिपल इंजन' की धाक रहेगी। जिला पार्षदों को मालूम है कि ट्रिपल इंजन के जरिए वे अपने क्षेत्रों में विकास की रफ्तार को बढ़ा सकते हैं।