हरियाणा के 18000 से ज्यादा कैदियों और उनके परिजनों के लिए खुशखबरी है। जेल विभाग कैदियों को उनके परिजनों से टेलीफोन पर बात कराने जा रहा है।
हर सप्ताह पांच-पांच मिनट तक कैदी अपने परिजनों के साथ बतिया सकेंगे।
यह प्रस्ताव प्रदेश सरकार के पास पहुंच गया है। जल्द ही इस पर फैसला हो सकता है।
जेल विभाग के अनुसार जैसे ही किसी कैदी या बंदी को जेल में भेजा जाएगा तो वह जेल अथॉरिटी को दो टेलीफोन नंबर देगा।
अब तक किसी भी कैदी या बंदी को अपने परिजनों के साथ टेलीफोन पर बात करने की सुविधा नहीं है। इससे मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
प्रदेश की ऐसी कोई जेल नहीं है जिसमें से मोबाइल फोन बरामद न हुए हों।
जेल प्रशासन के सख्त होने के बावजूद किसी न किसी तरीके से मोबाइल फोन, चार्जर और सिम कार्ड जेल के भीतर पहुंच रहे हैं।
अवैध रूप से जेल के भीतर पहुंचे मोबाइल फोन जाम रखने के लिए जैमर लगाए गए थे मगर जैमर भी फेल हो गए।
अब जेल विभाग ने मोबाइल फोन के अवैध रूप से इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए दूसरा तरीका ढूंढा है।
उन्हें टेलीफोन पर परिजनों से बात करने की इजाजत दी जाएगी।
यह होगा टेलीफोन पर बात करने का तरीका
जेल के मेन गेट पर किसी एक कंपनी के टेलीफोन लगाए जाएंगे। टच स्क्रीन होगी।
कैदी या बंदी की तरफ से जो दो टेलीफोन नंबर दिए जाएंगे, उन्हें इसमें फीड किया जाएगा।
जो कैदी किसी भी नंबर पर बात करना चाहेगा, उस नंबर पर टच करेगा।
वह एक बार पांच मिनट तक बात कर सकेगा। पांच मिनट के बाद काल बंद हो जाएगी।
काल के जरिए हुई बातचीत रिकार्ड भी होगी। एक सप्ताह में दो बार बातचीत हो सकेगी।
मोबाइल फोन मिला तो अलग से काटनी होगी एक साल की कैद
अगर किसी कैदी या बंदी के पास मोबाइल फोन मिला तो उसके खिलाफ एक साल की कैद वाले अपराध में मामला दर्ज होगा।
अगर अदालत से सजा हुई तो कैदी को वह सजा पहले से मिली सजा पूरी होने के बाद काटनी होगी। फिलहाल दोनों सजाएं एक साथ काटने का प्रावधान है।