पहले खिलाड़ी कुश्ती और मुक्केबाजी तक सीमित रहते थे। लेकिन टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण जीतकर पानीपत के खंडरा गांव के नीरज चोपड़ा ने युवाओं को नई दिशा दी। नीरज के ओलंपिक में गोल्ड जीतने के बाद भाला फेंक के प्रति युवाओं में क्रेज काफी बढ़ा। इसके बाद नीरज हरियाणा ही नहीं देश भर में स्पोर्ट्स आइकन बन गए। 28 अगस्त, 2023 का दिन नीरज की जिंदगी में हमेशा खूबसूरत याद की तरह जुड़ा रहेगा। इस दिन हंगरी के बुडापेस्ट में 88.17 मीटर भाला फेंककर वे वर्ल्ड चैंपियन बने थे। साथ ही सीनियर विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले वे पहले भारतीय एथलीट बने। एशियन गेम्स में भी नीरज ने सीजन के सर्वश्रेष्ठ 88.88 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता। हालांकि, वे पेरिस ओलंपिक और डायमंड लीग में स्वर्ण पदक से चूक गए।
खेलों को विश्वस्तर तक ले जाने के लिए हरियाणा की खेल नीति का भी काफी योगदान है। प्रदेश में तीन राज्यस्तरीय, 21 जिलास्तरीय और 245 ग्रामीण स्टेडियम सरकार ने बनवाए हैं। हरियाणा देश का पहला राज्य है, जो पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को पुरस्कार के रूप में सर्वाधिक नकद राशि देता है। ओलंपिक में पदक जीतने पर 2.5 करोड़ से लेकर 6 करोड़ रुपये तक पुरस्कार राशि दी गई है। एशियाई खेलों के पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकार 75 लाख रुपये से लेकर 3 करोड़ रुपये पुरस्कार स्वरूप देती है। ‘पदक लाओ, पद पाओ नीति’ के तहत खिलाड़ियों को खेल विभाग में सरकारी नौकरी भी दी जाती हैं।
खेलो इंडिया शुरू होने के बाद खिलाड़ियों के प्रदर्शन में काफी सुधार आया है। 2016 में जब मैंने निशानेबाजी की शुरुआत की थी, तब लोग कुश्ती और मुक्केबाजी के अलावा दूसरे खेलों को ज्यादा तवज्जो नहीं देते थे। लेकिन आज हालात बदल चुके हैं। लोग अपने बच्चों को कुश्ती और मुक्केबाजी के अलावा दूसरे खेलों में भी भेज रहे हैं। खेलों में हरियाणा का भविष्य और भी शानदार होगा। -सरबजोत सिंह, ओलंपियन निशानेबाज।