फतेहाबाद। मोबाइल फोन बच्चों से लेकर उम्रदराज पर असर डाल रहा है। मोबाइल फोन के ज्यादा प्रयोग से लोग मनोरोगी हो रहे हैं और उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। इस कारण वे अकेले रहना पसंद कर रहे हैं। सबसे ज्यादा असर युवाओं पर पड़ रहा है। यही नहीं कई ऐसे कारण भी हैं जिसके कारण युवा डिप्रेशन में जा रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में इस साल अप्रैल से जून माह तक डिप्रेशन के 1618 मरीज आए हैं। यही नहीं ओपीडी में 2723 मरीज फॉलोअप लेने के लिए पहुंचे है। प्यार में ब्रेकअप होने या फिर काम में असफलता होने के कारण भी युवा तनावग्रस्त हो रहे हैं। मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना 40 से 50 मामले आ रहे हैं। जिसमें 50 फीसदी मामले युवाओं से जुड़े हैं। जो कि नींद न आने और किसी से बात न करने या फिर सुसाइड करने का मन करने जैसे लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों की माने तो समय पर अगर लक्षण पहचान कर उपचार लिया जाए तो बीमारी पर काबू पाया जा सकता है अन्यथा बीमारी गंभीर होने पर उपचार में लंबा समय लग सकता है।
मानसिक तनाव में नशे की तरफ जा रहे युवा
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. गिरीश का कहना है कि नशा बढ़ने के पीछे तनाव भी एक कारण है। युवा तनाव को कम करने के लिए नशा ले रहे हैं और इसकी लत पड़ रही है। ओपीडी में अप्रैल से जून माह तक 3082 मरीज आए हैं। इसमें 612 मरीज नशा छोड़ने के लिए उपचार के लिए आए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के मेंटल हेल्थ कार्यक्रम की स्थिति
मेडिकल ऑफिसर - 0
मनोरोग विशेषज्ञ - 1
क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक - 1
मनोरोग नर्स - 1
मनोरोग सोशल वर्कर - 0
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मनोरोग विशेषज्ञ की ओपीडी में तीन माह में ये आए है मरीज
तनाव - 1618
एंजायटी - 598
सिजोफ्रेनिया - 93
बायपोलर डिस्ऑर्डर - 17
गंभीर तनाव - 13
दौरे आना - 130
नोट : ये आंकड़ा इस साल अप्रैल से जून माह तक का है।
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तनाव में हैं तो बात जरूर शेयर करें, भरपूर नींद लेना जरूरी
नागरिक अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. गिरीश का कहना है कि खुद को तनाव में न रखें और भरपूर नींद लें। तनावग्रस्त होने के कई कारण है। युवाओं में खासकर प्रेम-प्रसंग होना वजह है। ब्रेकअप होने के बाद तनाव में चले जाते हैं। भविष्य को लेकर भी ज्यादा सोचना भी कारण है। महिलाएं भी घरेलू कलह को लेकर डिप्रेशन का शिकार हो रही हैं। तनाव कम करने के लिए अच्छा खानपान लें, कोई भी खेल खेलें, अपनी पसंद के गाने सुने। जो भी करीबी है उसे अपने तनाव के बारे में जरूर बताएं और उससे बात साझा करें। मां-बाप अपने बच्चों पर नजर रखें, अगर वह किसी से बात नहीं कर रहा है, खानपान कम कर दिया है या फिर नींद नहीं ले रहा है तो मनोचिकित्सक को जरूर दिखाएं।