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फतेहाबाद: 12 ट्यूबवेल केमिकल और बैक्टीरिया जांच में सात फीसदी नहरी पानी फेल

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जनस्वास्थ्य विभाग कार्यालय में पानी टेस्टिंग लैब।
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फतेहाबाद। पीने के लिए सप्लाई किए जा ट्यूबवेल का पानी स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। जन स्वास्थ्य विभाग ने फतेहाबाद डिवीजन में पिछले 10 माह में लिए गए ट्यूबवेल के पानी का केमिकल टेस्ट किया, इनमें तीन फीसदी सैंपल फेल मिले हैं। जांच के बाद 12 ट्यूबवेल की सप्लाई बंद की गई है। वहीं बैक्टीरिया जांच में सात फीसदी नहरी पानी सप्लाई के सैंपल भी फेल मिले हैं।
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बता दें कि पीने के पानी के केमिकल टेस्ट में 12 तरह के पैरामीटर पर जांच की जाती है। जिसमें मुख्य रूप से एलक्लेनिटी, क्लोराइड, हार्डनेस, टीडीएस, पीएच, फ्लोराइड, आयरन, अमोनिया, नाइट्रेट, निटरेट, फास्फेट, क्लोरिन की मात्रा जांची जाती है। इन 328 सैंपल में से 12 की सैंपल जांच में फेल मिले हैं। वहीं जनस्वास्थ्य विभाग ने पिछले 10 माह में बैक्टीरिया लाॅजिकल टेस्ट के लिए 2203 सैंपल लिए थे। जांच के दौरान सात फीसदी सैंपल फेल मिले हैं। विभाग द्वारा लिए गए 2203 सैंपल में से 160 सैंपल फेल पाए गए हैं। जांच के दौरान 160 ऐसी जगह मिली जहां पर मिक्स पानी सप्लाई हो रहा था। मिक्स पानी पीने से डायरिया समेत पेट के अन्य रोग हो सकते हैं। संवाद
लैब में लिए गए पानी के सैंपल की रिपोर्ट की स्थिति
फिजिकल एवं केमिकल टेस्ट
सब डिविजन कुल सैंपल फिट अनफिट
पीएचईएसडी नंबर दो 184 174 10
पीएचईएसडी नंबर तीन 156 154 2
बैक्टीरिया टेस्ट
सब डिविजन कुल सैंपल फिट अनफिट
पीएचईएसडी नंबर दो 1393 1277 113
पीएचईएसडी नंबर तीन 810 766 44
दूषित पानी पीने से हो सकते है रोगग्रस्त
नागरिक अस्पताल के चिकित्सक डॉ. मनीष टुटेजा का कहना है कि शरीर के लिए पानी बहुत जरूरी है। लेकिन पानी को लेकर लापरवाही महंगी पड़ सकती है। इससे कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं। कई बार तो हालत गंभीर होने पर जान को खतरा हो जाता है। दूषित पानी में छोटे-छोटे जीवाणु होते हैं, जिनसे बीमारी शरीर में प्रवेश करती है। गंदा पानी पीने से बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है। दूषित पानी से नहाने से ही कई बीमारियां हो जाती हैं। जैसे त्वचा रोग, खुजली, दाद आदि। जितना हो सके पानी को उबालकर ठंडा करके ही पीया जाए।
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लैब में आम लोग नहीं करवा रहे जांच
पानी जांच को लेकर लोग भी जागरूक नहीं है जबकि ये सबसे ज्यादा जरूरी है। जनस्वास्थ्य विभाग की करीब दो करोड़ से तैयार लैब में आम लोग पानी जांच करवाने के लिए नहीं आ रहे हैं। इसके पीछे कारण ये ही है कि फीस ज्यादा है। सरकारी काम में पानी जांच रिपोर्ट अनिवार्य पर ही करवाई जा रही है।
कोट
जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी पानी जांच के लिए समय-समय पर फिजिकल और कैमिकल व बैक्टीरिया टेस्ट करते रहते हैं। जिन जगहों के सैंपल फेल आते है वहां पर अगर पानी लीकेज है तो उसे ठीक करवाया जाता है और अगर ट्यूबवेल का पानी सही नहीं है तो सप्लाई बंद कर दी जाती है।
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- शर्माचंद लाली, जिला सलाहकार
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