तीन कृषि कानून को लेकर रतिया इलाके के किसानों में सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के प्रति विरोध बढ़ता ही जा रहा है। एक दिन पहले जहां गांव बोड़ा के ग्रामीणों व किसानों ने भाजपा-जजपा नेताओं के गांव में घुसने पर पाबंदी लगाने के फ्लेक्स लगाए थे वहीं वीरवार को रतिया क्षेत्र के गांव भानी खेड़ा व अहरवां में भी ग्रामीणों ने सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को गांव में न घुसने देने के चेतावनी बोर्ड लगा दिए। भानीखेड़ा के ग्रामीणों गुरतेज सिंह, रंजीत सिंह, करन सिंह, भजन सिंह, जींदू सिंह, बाबू सिंह, लबा सिंह और शेर सिंह आदि ने बताया कि केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को लाकर किसानों को खत्म करने का निर्णय लिया है। इन तीन अध्यादेशों से किसानों को बहुत ज्यादा नुकसान होगा और किसानों की फ सल कौड़ियों के भाव बिकेगी। जिस कारण पूरे देश के किसान मोदी सरकार के इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। हरियाणा में भी सत्ताधारी भाजपा जजपा की नेता बिल के समर्थन में तो आए, लेकिन किसानों के साथ खड़े नहीं हो रहे हैं जिस कारण किसानों में भाजपा-जजपा के नेताओं खिलाप विरोध बढ़ता जा रहा है। किसानों ने कहा कि वह भाजपा-जजपा के नेताओं के पास जा चुके हैं लेकिन कोई भी उनका समर्थन नहीं कर रहा। जिस कारण वीरवार को गांव के किसानों ने भाजपा-जजपा के नेताओं का विरोध करने का निर्णय लिया है और गांव में बोर्ड लगाया है कि कोई भी भाजपा-जजपा का नेता गांव में नहीं घुसे। अगर उक्त दोनों पार्टी के नेता गांव में आते हैं तो ग्रामीण उसका कड़ा विरोध करेंगे और उन को काले झंडे दिखाते हुए गांव से बाहर कर देंगे। वहीं दूसरी तरफ गांव अहरवां के ग्रामीणों में किसानों ने भी भाजपा-जजपा के नेताओं को गांव में न घुसने देने की चेतावनी दी है। किसान नेता भगवान पाल सिंह ने बताया कि ग्रामीणों ने उक्त फैसला तीन कृषि अध्यादेश के विरोध में लिया है और कोई भी भाजपा-जजपा का नेता गांव में आने की कोशिश करता है तो उसे अमन और शांति भंग होने की आशंका के चलते गांव से बाहर कर दिया जाएगा।