फतेहाबाद। सिविल सर्जन कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर हुए फर्जीवाड़ा मामले में कार्रवाई अभी तक अटकी हुई है। विजिलेंस ने मामले में सोर्स रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय को भेजी है। मुख्यालय की अनुमति के बाद ही विजिलेंस मामले की जांच शुरू करेगी। अगर मुख्यालय जांच की अनुमति नहीं देता है तो पुलिस विभाग को फाइल खोलनी पड़ेगी।
सिविल सर्जन कार्यालय ने करीब डेढ़ माह पहले फर्जीवाड़े की रिपोर्ट पुलिस विभाग को भेजी थी। पुलिस विभाग से शहर थाना में मामला आ चुका है लेकिन विजिलेंस का बहाना बनाकर अभी तक कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा मामले को लेकर बनाई कमेटी फर्जीवाड़े का खुलासा भी कर चुकी है। कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया था कि सिविल सर्जन कार्यालय में करीब 80 फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए गए। इसके अलावा 842 संदिग्ध पाए गए और उनका रिकॉर्ड नहीं मिला हालांकि बाद में कुछ प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड मिला भी था।
ऐसे हुआ था फर्जीवाड़ा
कमेटी की जांच रिपोर्ट में सामने आया था कि जनवरी 2018 से लेकर जुलाई 2022 तक सिविल सर्जन कार्यालय ने 3769 दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी किए। जांच के दौरान 922 संदिग्ध पाए गए। टीम ने जब संदिग्ध प्रमाण पत्रों की जांच की तो 80 दिव्यांग प्रमाण पत्रों का रिकॉर्ड मिला। रिकार्ड जांच के दौरान करीब 30 प्रमाण पत्र ऐसे पाए गए जिनमें असेसमेंट शीट और दिव्यांग प्रमाण पत्र में प्रतिशत अलग-अलग मिली। करीब 32 दिव्यांग प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिनकी असेसमेंट शीट में हस्ताक्षर नहीं थे। इसके अलावा अन्य प्रमाण पत्र ऐसे मिले जिनमें असेसमेंट शीट और दिव्यांग प्रमाण पत्र में हस्ताक्षर नहीं मिले और प्रतिशत अलग-अलग थी। इसके अलावा कई असेसमेंट शीट में कटिंग भी मिली। रिकॉर्ड न मिलने के कारण करीब 842 दिव्यांग प्रमाण पत्र संदिग्ध थे।
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सिविल सर्जन कार्यालय में हुए दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जीवाड़ा मामले की सोर्स रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी गई है। मंजूरी मिलने के बाद ही विजिलेंस जांच शुरू करेगी।
- राकेश मलिक, डीएसपी, विजिलेंस