फतेहाबाद। वैसे तो फतेहाबाद जिला 10 बार बाढ़ की चपेट में आ चुका है, लेकिन अब हालात और भयंकर हो चुके हैं। बाढ़ के पानी का असर यह है कि इसने 30 साल पहले आई बाढ़ के भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है। गांवों के बुजुर्ग भी मान रहे हैं कि 1993 व 2010 में आई बाढ़ से इतना नुकसान नहीं हुआ था, जो इस बार हुआ है। पहली बार उनको लगा है कि प्रकृति तांडव मचा रही है। ढाणियां लगभग जलमग्न हो गई हैं, आठ फुट से अधिक पानी का बहाव गांवों में देखा जा रहा है।
शिवालिक की पहाड़ियों से आने वाली बरसाती नदी घग्गर एक बार फिर फतेहाबाद के लिए बिहार की कोसी नदी जैसी त्रासदी पहुंचा रही है। राजस्व विभाग के अनुसार, 1962 में पहली बार फतेहाबाद में बाढ़ आई थी। इसके बाद जब भी पहाड़ों में बारिश अधिक हुई तो फतेहाबाद में इस नदी ने कहर बरपाया है। 1993 में आई घग्गर में बाढ़ के कारण फतेहाबाद के 110 गांव प्रभावित हुए थे और आबादी को भी काफी नुकसान हुआ था। मगर इस बार जो बाढ़ का मंजर देखा जा रहा है, वह काफी भयंकर बताया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारी राहत कार्यों में जुटे हैं, लेकिन पीछे से बाढ़ के पानी का बहाव इतना अधिक है कि पानी लगातार फतेहाबाद की ओर बढ़ रहा है। डबवाली-दिल्ली रोड बाईपास के ऊंचा होने के कारण पानी अभी शहर के भीतर तक नहीं पहुंच सका है। संवाद
1993 में आई बाढ़ का पानी पहुंच गया था शहर तक
फतेहाबाद में 1993 में आई बाढ़ ने भयानक मंजर दिखाया था। इस दौरान फतेहाबाद की चिल्ली झील तक पहुंच गया था और पानी ओवरफ्लो होकर जवाहर चौक तक आ गया था। जिसके चलते बाढ़ के पानी से बचाव के लिए शहर में अनेक स्थानों पर बांध बनाने पड़े थे।
2010 में दो से तीन फुट तक था पानी, इस बार पांच फुट से ज्यादा
गांव धिड़ के बुजुर्ग बंता सिंह ने बताया कि वह 1993 व 2010 की बाढ़ को देख चुके हैं। 1993 में जब बाढ़ आई थी, उस समय हालात काफी नाजुक हो गए थे। उस समय तो गांव तक पानी आ गया था, लेकिन 2010 में जो पानी आया था, उससे इतना नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस बार जो पानी आया है, ऐसा पानी का बहाव हम 30 साल बाद ही देख रहे हैं। 2010 की आई बाढ़ का पानी दो से तीन फुट तक था, लेकिन अब तो पानी पांच से छह फुट तक पहुंच गया है। गांव काताखेड़ी के 70 साल के बुजुर्ग हरप्रीत सिंह ने बताया कि पहले पानी का बहाव इतना नहीं होता था, बाढ़ आती जरूर थी, लेकिन वह धीरे-धीरे गांवों की ओर बढ़ती थी, लेकिन इस बार पानी का तेज बहाव देखने को मिल रहा है।
मवेशियों को ले जाने की भी सुविधा नहीं मिली
ढाणी बिकानेरी के दिलवार सिंह व हरपाल सिंह ने बताया कि उनकी ढाणी पूरी तरह से पानी से जलमग्न हो गई है। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। उनके क्षेत्र के कई घरों को नुकसान हो गया है। नुकसान भी इतना है कि मवेशियों को ले जाने की सुविधा भी नहीं मिल रही है।