फतेहाबाद। जंग लगी व्यवस्था के कारण दिव्यांग रेखा अधिकारियों के चौखट पर पहचान पाने के लिए भटकती रही। कोई भी अधिकारी दिव्यांग रेखा के दर्द के मर्म को नहीं समझ सका। रेखा ने कहा कि आखिर कोई अधिकारी मेरी समस्या को सुनता क्यों नहीं। प्रशासनिक अधिकारियों के बेरुखी के कारण हरनाम सिंह कॉलोनी निवासी रेखा (32) की पहचान का कोई आधार नहीं है। यही नहीं रेखा के माता-पिता की मौत हो चुकी है और भाई गोकुल और भाभी दयावंती सहारा बने हुए हैं। दिव्यांग प्रमाण पत्र को लेकर भाई-भाभी उपायुक्त राहुल नरवाल से शिविर में मिल चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
मंगलवार को पार्षद प्रतिनिधि योगी हंसराज दिव्यांग रेखा को लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचे और आधार कार्ड बनवाने की मांग रखी। योगी हंसराज ने कहा कि रेखा 32 साल की हो चुकी है, लेकिन उसका कद ढाई फुट है और वह चलने-फिरने में भी असमर्थ है। दिव्यांग होने के कारण आंखों की पुतली और उंगलियों की बायोमेट्रिक न होने के कारण आधार कार्ड नहीं बन पाया है। भाई-भाभी मजदूरी करके संभाल रहे हैं। कोई ऐसा आधार सेंटर नहीं है, जहां पर लेकर नहीं गए हैं, लेकिन नहीं बन पाया है। डीसी के सामने भी मांग रखी गई, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। सरकार चाहे तो स्पेशल कैटेगरी में शामिल करके दिव्यांग प्रमाण पत्र व अन्य योजनाओं का लाभ दे सकती है।
संस्था 750 रुपये महीना दे रही पेंशन
सरबत दा भला संस्था के प्रधान रसप्रीत ग्रोवर और संयोजक विनोद अरोड़ा ने बताया कि दिव्यांग होने के कारण आधार कार्ड नहीं बन रहा है। इसके चलते इसे पहचान नहीं मिल पाई है। दिव्यांग की जो पेंशन होती है वह भी नहीं मिल रही है। संस्था की तरफ से हर माह 750 रुपये पेंशन के रूप में दिए जा रहे है। अन्य संस्थाओं को भी मदद के लिए आगे आना चाहिए।
कोट
नए आधार कार्ड के लिए फिंगर प्रिंट और आंखों की पुतली यानि रेटिना स्कैन होना जरूरी होता है। इसके बाद ही आधार कार्ड बना पता है। इसके अलावा अगर 17 साल से ज्यादा उम्र है और नया आधार कार्ड बनवाना है तो वह हिसार या चंडीगढ़ मुख्यालय में ही बनेगा। मुख्यालय में ही कोई समाधान हो पाएगा।
-राजकुमार मेहता, आधार सेंटर संचालक