गांव मेहूवारा में स्थित हाल्ट रेलवे स्टेशन।
फतेहाबाद। भट्टू कलां खंड के गांव मेहूवाला में बना रेलवे हाल्ट जर्जर हो चुका है। करीब 20 से भी अधिक समय से बना हाल्ट कभी भी गिर सकता है। हैरानीजनक बात यह है कि मात्र 33 किलोमीटर दूर सिरसा जंक्शन पर बैठे रेलवे के अधिकारी इससे अनजान बने हुए हैं। हाल्ट की दीवारें व छत गिरने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। हर समय हादसा होने का डर रहता है। बता दें कि गांव मेहूवाला के इस रेलवे हाल्ट पर दो गांवों के लोग विभिन्न गंतव्यों की ओर यात्रा करने के लिए आते हैं। भवन की जीर्ण-शीर्ण अवस्था देखकर टिकट घर से टिकट लेते समय भी यात्री डरते हैं। यही हालात यहां पर काम करने वाले कर्मचारियों के होते हैं। दरअसल, गांव मेहूवाला हाल्ट सिरसा और हिसार रेलवे लाइन के बीच स्थित है। गांव मेहूवाला के अलावा यहां से गांव बनमंदोरी के सैकड़ों यात्री रोजाना हिसार, सिरसा, दिल्ली तथा अन्य स्थानों के लिए यात्रा करते हैं। फिर भी यह रेलवे हाल्ट सुविधाओं का अभाव झेल रहा है। संवाद
तीन रेलगाड़ियाें का होता है ठहराव
इस रेलवे हाल्ट पर प्रतिदिन बठिंडा से रेवाड़ी, फाजिल्का-रेवाड़ी, रेवाड़ी से श्रीगंगानगर ट्रेन का ठहराव होता है। इन गाड़ियों के जरिये हिसार व सिरसा में रोजगार के लिए जाने वाले दैनिक यात्री भी काफी संख्या में हैं।
बारिश का पानी टिकट घर में भर रहा
ग्रामीण नरेश कुमार, संदीप कुमार, राकेश, सत्यवान आदि ने बताया कि यहां बने टिकट घर का कमरा बीस वर्ष से ज्यादा पुराना हो चुका है। अब इस कमरे की हालत जर्जर हो चुकी है। कमरे की छत में लगा पत्थर सीलन के कारण नीचे गिरना शुरु हो गया है। बारिश का सारा पानी कमरे में आता है। टिकट घर का यह कमरा कभी भी ढह सकता है। कुछ वर्ष पहले रेलवे प्लेटफार्म को ऊंचा उठा दिया गया था और स्टेशन के पीछे से सिरसा की ओर जाने वाली सड़क को भी ऊंचा कर दिया गया था। जिस कारण से स्टेशन काफी नीचा हो चुका है और बारिश का सारा पानी स्टेशन में एकत्रित हो जाता है। इसकी सूचना ग्राम पंचायत ने बीकानेर मंडल को भी दी है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। यात्रियों के लिए हाल्ट परिसर में शौचालय की कोई सुविधा नहीं है, जिससे उन्हें असुविधाओं का सामना करना पड़ता है।
कोट
गांव मेहूवाला में रेलवे हाल्ट की जर्जर हालात के बारे में पहले पता नहीं था। अगर यहां पर हालत खराब है तो इसकी जांच करवाई जाएगी। इसके बाद मरम्मत करवाने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
-आनंद स्वरूप, एडीईएन, रेलवे