जाखल। नगर पालिका जाखल के पार्षदों के कार्यकाल को पूरा हुए करीब 9 माह हो चुके हैं। उसके बाद से शहर की सरकार की कमान प्रशासक यानी एसडीएम के हाथ में है। नगर पालिका का दर्जा मिलने के बाद से लोगों को जो उम्मीद थी उस तरह के विकास कार्य शहर में पार्षदों की खींचतान के चलते नहीं हो पाए।
बता दें कि भाजपा शासनकाल में 2017 में जाखल को फिर से नगर पालिका का दर्जा मिला था। उस समय शहर में 13 वार्ड थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 14 हो चुकी है। उससे पूर्व वर्ष 2000 तक भी जाखल नगर पालिका थी। तत्कालीन इनेलो सरकार ने लोगों की मांग पर जाखल को ग्राम पंचायत का दर्जा बहाल कर दिया था। ग्राम पंचायत से नगरपालिका का दर्जा घोषित होने के बाद पांच साल तक नगरवासियों द्वारा चुने गए पार्षदों में एकता नहीं रहने से वैसा विकास नहीं हो पाया, जैसी लोगों ने उम्मीद की थी।
इसी वर्ष जनवरी माह में नगरपालिका का कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव में हो रही देरी की वजह से शहर में विकास कार्य रुक गए हैं। शहर में छोटी-छोटी समस्याओं तक का भी निवारण नहीं हो रहा है। नगर पार्षदों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद शहर का विकास नगरपालिका के अफसरों के जिम्मे है, लेकिन अफसर गंभीर नजर नहीं आते हैं। संवाद
पांच साल तक पार्षद व्यक्तिगत हितों में ही उलझे रहे
जाखल के विकास को रफ्तार देने के उद्देश्य से इसका ग्राम पंचायत से नगरपालिका का दर्जा घोषित किया गया था। मगर पार्षदों में आपसी फूट के जलते जमीनी स्तर पर नगर के हालात गांव से बदतर रहे। कई पार्षद पांच साल के कार्यकाल में विकास के मुद्दों की अपेक्षा ज्यादातर व्यक्तिगत हितों में उलझे हुए नजर आए। वर्ष 2017 में गठित की गई नगरपालिका आरंभ से ही किसी राजनीतिक अखाड़े से कम नहीं रही। यहां पांच साल की अवधि में दो बार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बने, जो ज्यादा समय गुटबाजी में ही उलझे रहे। पांच वर्षीय कार्यकाल में पार्षदों की आपसी गुटबाजी के चलते शहर का विकास कार्य सुस्त रहे। शहर में सफाई, लाइट, गलियों का निर्माण नहीं होना मुख्य समस्याएं हैं।
शहर के इन वार्ड में विकास कार्य न होने से लोगों में रोष
अब तक शहर के वार्ड 7, 8, 9 व 10 में विकास कार्य शून्य हैं। लोगों का कहना है कि नगरपालिका प्रशासन द्वारा इन वार्डों में कोई विकास कार्य नहीं कराया गया है। शहर के वार्ड 10 व 11 की नायक बस्ती में आने जाने के लिए प्रशासन द्वारा आज तक कोई रास्ता तक नहीं दिया गया है। दूषित जल निकासी के लिए पाइप लाइन डालने के प्रोजेक्ट पर काम हुआ, लेकिन यह कार्य भी नगर की जनता की सुविधा की अपेक्षा दुविधा ही बना हुआ है। गंदे पानी की निकासी के लिए पाइप लाइन बिछाने के लिए उखाड़ी गई गलियों का पुनर्निर्माण भी अभी लंबित है।
शहर की छोटी सरकार पिछले पांच वर्ष के दौरान विवादों में ही रही। शहर का कोई विकास कार्य नहीं हो पाया। नगरपालिका बनने से लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब शहर का विकास रफ्तार पकड़ेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो सका।
-डॉ. राजेश शर्मा, शहरवासी, जाखल
शहर का विकास कार्य पार्षदों व प्रधान की आपसी गुटबाजी की भेंट चढ़ गया। नगरपालिका के पहले 5 वर्ष के दौरान कोरोनाकाल का आना व उसके बाद पार्षदों व प्रधान में आपसी सहमति न बनने के चलते शहर के विकास कार्य को ग्रहण लग गया।
-दीपक खनेजा, अधिवक्ता, जाखल
शहर में आ रही समस्याओं को लेकर जाखल नगरपालिका की एक टीम बनाकर शहर के सभी वार्डों का सर्वे करवा दिया जाएगा। इसके बाद कोई भी समस्या सामने आती है, तो उसे तुरंत प्रभाव से दूर करने का काम किया जाएगा। आमजन को किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो, इसे लेकर प्रशासन हर संभव प्रयासरत है।
-प्रतीक हुड्डा, एसडीएम एवं प्रशासक, जाखल नगरपालिका
हमारे 2 वर्ष के कार्यकाल के दौरान शहर में विकास कार्यो ने रफ्तार पकड़नी शुरू की थी। उस समय करीबन 10 करोड़ रुपए की लागत से कार्य को गति देने का काम किया गया था। शहर के विकास कार्य को लेकर हमने कभी भेदभाव नही किया। शहर के मल्टीप्लेक्स का निर्माण कार्य भी हमारे कार्यकाल के दौरान ही शुरू हुआ था।
-सीमा गोयल, पूर्व चेयरपर्सन, नगर पालिका जाखल
करीबन 3 वर्ष के कार्यकाल के दौरान शहर के कई वार्डो की सड़कों का निर्माण कार्य को पूरा करवाया गया था। शहर में सफाई व्यवस्था को दुरस्त करने के लिए डोर टू डोर टेंडर लगाया गया था। हमने अपने कार्यलय के दौरान शहर को विकास की औऱ ले जाने में किसी भी तरह की कोई कमी नही आने दी।
-कीर्ति मित्तल, पूर्व चेयरपर्सन, नगर पालिका जाखल