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Fatehabad News: हरे चारे का बढ़ा संकट, तूड़ी का स्टॉक होने लगा समाप्त

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फतेहाबाद की हरियाणा गोशाला के बाहर आया हरा चारा।
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फतेहाबाद। पिछले दिनों जिले में घग्गर नदी की वजह से आई बाढ़ के कारण गोशालाओं में हरे चारे का संकट खड़ा हो गया है। हारे चारे के रेट भी बढ़ गए हैं, जिस कारण गोशाला संचालकों व नंदीशाला संचालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तूड़ी का स्टॉक भी अब खाली होने लगा है और अब गोशाला संचालकों को पराली की तूड़ी की उम्मीद है।
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फतेहाबाद में 13 जुलाई को घग्गर के तटबंध टूटने से जाखल में पहले बाढ़ का प्रकोप बढ़ा। इसके बाद बाढ़ का पानी रतिया होते हुए फतेहाबाद तक पहुंच गया था। बाढ़ का पानी सात से आठ फुट तक हो गया था और पशुओं के लिए लगाया गया चारा पानी के कारण खराब हो गया। रतिया, जाखल व टोहाना क्षेत्र में पशुओं के चारे के लिए बरसीन व मक्की लगाई गई थी, जो खराब हो गई। इस दौरान अनेक पशुओं को ढाणियों से निकालकर शरणार्थी शिविरों में लाना पड़ा। अब बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अब दोबारा धान की रोपाई व हरे चारे की बिजाई का कार्य किया जा रहा है, जिस कारण हरे चारे का संकट बढ़ गया है और इसके दाम भी बढ़ गए हैं। इसका सबसे अधिक असर जिले के गोशाला प्रबंधकों को हो रहा है। जिले में इस समय 67 गोशालाएं हैं, इनमें भट्टूकलां क्षेत्र से 29 गोशालाएं हैं। साथ ही फतेहाबाद व टोहाना में एक नंदीशाला है। सबसे अधिक प्रभावित रतिया, टोहाना, जाखल व फतेहाबाद की गोशालाएं हरे चारे के लिए प्रभावित हो रही हैं।


चार से पांच रुपये प्रति किलो मिल रहा हरा चारा
जिले में जाखल, रतिया, टोहाना व फतेहाबाद के 118 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया था और फसलें तबाह हो गई थी। साथ ही हरे चारे की फसल भी इस बाढ़ के कारण प्रभावित हुई। अब हरे चारे का संकट सबसे अधिक गोशालाओं के लिए है। इसके दाम भी बढ़ गए हैं। पहले हरा चारा गोशालाओं को तीन रुपये प्रति किलो मिल रहा था, जो अब बढ़कर चार से पांच रुपये प्रति किलाे पहुंच गया है। इसी प्रकार तो तूड़ी पहले छह रुपये प्रति किलोग्राम मिल रही थी, उसके दाम बढ़कर सात से आठ रुपये हो गए हैं। तूड़ी का स्टॉक भी अब खत्म होने को है और धान की फसल खराब होने के कारण पराली की तूड़ी में भी आने को समय लगेगा, ऐसे में गोशाला प्रबंधकों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
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कोट
बाढ़ के बाद हरे चारे की मांग बढ़ गई है, जिस कारण इसके दामों में भी वृद्धि हुई है। नंदीशाला में प्रतिदिन 50 टन हरा चारा खरीदा जाता है, वहीं दानियों के द्वारा 30 से 40 टन हरा चारा दिया जाता है। रेट बढ़े हैं और हरे चारा कम है। अब आगे धान की फसल पकने के बाद ही पराली की तूड़ी से उम्मीद है।
-विनोद तायल, सेवक, श्रीकृष्ण प्रणामी सेवा समिति
कोट
हरे चारे की समस्या से पशुपालकों से लेकर गोशाला संचालकों तक को जूझना पड़ रहा है। बाढ़ के कारण जिले में हरे चारे का संकट बना है। प्रशासन को इस संबंध में कुछ कदम उठाने चाहिए।
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-अशोक भुक्कर, जिला प्रधान, गोशाला संघ
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