फतेहाबाद। नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट को एक बार फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। पांच साल तक अस्पताल प्रशासन जगह न होने का हवाला देकर प्रोजेक्ट शुरू नहीं कर पाया। अब ब्लड बैंक के साथ करीब 8 लाख से हॉल बनने के बाद भी प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है।
बताया जा रहा है कि विभाग अस्पताल की नई बिल्डिंग के निर्माण के चलते यहां ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट लगाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसके पीछे वजह ये है कि मशीनों की फिटिंग में करीब 8 से 10 लाख रुपये खर्च का अनुमान है। सवाल ये है कि अगर प्रोजेक्ट नहीं लगाना था तो हॉल क्यों तैयार किया गया।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि लाइसेंस के लिए सीनियर ड्रग कंट्रोलर को लिखा गया है। निरीक्षण के बाद ही लाइसेंस मिलेगा। फिलहाल स्थिति ये है कि प्लेटलेट्स के लिए मरीजों को निजी लैब या फिर दूसरे जिले में जाना पड़ेगा। एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को फायदा मिलता है। थैलेसीमिया मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
वर्ष 2018 में जारी हुई थी मशीनें
स्वास्थ्य विभाग ने कंपोनेंट सेपरेटर मशीन कोरोना महामारी शुरू होने से पहले वर्ष 2018 में ही जारी कर दी थी। लेकिन भवन न होने के चलते मशीन पड़ी रही और फिर इन मशीनों को कोरोना महामारी के दौरान अग्रोहा मेडिकल में भेज दी थी। इसके बाद कुछ मशीनें दोबारा भेजी गई। ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट को लेकर वर्ष 2021 में डीजी कार्यालय के अधिकारियों ने स्टेटस देखने के लिए निरीक्षण किया था। लेकिन यहां डिब्बे में बंद मशीनें देखकर फटकार लगाई थी और हॉल बनाने के लिए एस्टीमेट भेजने के निर्देश दिए थे। वर्ष 2023 में एस्टीमेट बना और डिमांड की गई। फरवरी 2024 में हॉल का निर्माण शुरू हुआ था।
एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को हो सकता है फायदा
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन अगर लगती है तो एक यूनिट रक्त से चार मरीजों को फायदा हो सकता है। थैलेसीमिया में ऐसे मरीजों को लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) की जरूरत होती है। ब्लड से आरबीसी अलग करके थैलेसीमिया के मरीजों को चढ़ाना आसान होगा। डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ाए जाते हैं। इस मशीन से खून से प्लेटलेट्स अलग किए जा सकते हैं। बर्न केस के मरीजों को बचाने के लिए प्लाजमा की जरूरत होती है। एड्स के मरीजों को श्वेत रक्त कणिकाओं (डब्ल्यूबीसी) की जरूरत होती है।
दाखिल मरीजों को विभाग उपलब्ध करवाता है प्लेटलेट्स
सरकारी अस्पताल में दाखिल डेंगू पीड़ित मरीज को अगर प्लेटलेट्स चढ़ाने की जरूरत पड़ती है तो विभाग ही उपलब्ध करवाता है। पिछले साल इसको लेकर हिसार के नागरिक अस्पताल से अनुबंध किया गया था।
जिले में ये है डेंगू मरीजों की स्थिति
वर्ष डेंगू मरीज मिले
2015 189
2016 38
2017 419
2018 56
2019 29
2020 35
2021 993
2022 154
2023 89
2024 14
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर प्रोजेक्ट को लेकर लाइसेंस नहीं मिला है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को लिखा गया है। चुनाव के बाद ही उम्मीद है निरीक्षण हो पाएगा। - डॉ. बुधराम, एसएमओ, नागरिक अस्पताल, फतेहाबाद।