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Fatehabad News: स्नातकोत्तर में हिंदी विषय पढ़ना पसंद कर रहे विद्यार्थी

Thu, 31 Aug 2023 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद के महिला महाविद्यालय भोड़िया खेड़ा में छात्राओं को पढ़ाते हुए असिस्टेंट प्रोफेसर।
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फतेहाबाद। स्नातकोत्तर में दाखिले को लेकर प्रक्रिया बंद हो चुकी है। महिला महाविद्यालयों में हिंदी संकाय में 50 फीसदी सीटों पर दाखिले हो चुके हैं। महाविद्यालय भूना में एमए हिंदी में सभी सीटें भरी जा चुकी है। ओपन काउंसिलिंग अगर दोबारा शुरू होती है तो दाखिले और होने की उम्मीद है।
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हिंदी प्राध्यापकों का कहना है कि छात्रों का रुझान हिंदी विषय की तरफ है लेकिन अगर इसे रोजगार से जोड़ दिया जाए तो रुझान बढ़ सकता है। हिंदी संकाय को लेकर प्राध्यापकों की जो कमी है उसे भी पूरा किया जाए। रतिया के महिला महाविद्यालय में चार पद स्वीकृत है लेकिन स्थायी नियुक्ति नहीं है यहां पर एक्सटेंशन पर दो प्राध्यापक नियुक्त है।

कॉलेजों में प्राध्यापक कम तो वर्क लोड ज्यादा
महाविद्यालयों में प्राध्यापकों की भी कमी है। विभाग ने कॉलेजों में जो पद तय कर रखे हैं उससे कई जगह कम प्राध्यापक है तो कहीं स्थायी नियुक्ति नहीं है। इसके अलावा पदों से कई गुना ज्यादा वर्कलोड है। राजकीय महाविद्यालय भूना में तीन पद स्वीकृत है लेकिन यहां पर दो प्राध्यापक है। जबकि वर्क लोड 8 प्राध्यापकों का है। राजकीय महिला महाविद्यालय रतिया में चार पद स्वीकृत है लेकिन यहां पर दो प्राध्यापक है। लेकिन स्थायी नियुक्ति एक भी नहीं है। राजकीय महिला महाविद्यालय भोड़िया खेड़ा में 6 पद स्वीकृत है और यहां पर 5 प्राध्यापक नियुक्त है।
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एमए हिंदी में ये है दाखिलों की स्थिति
राजकीय महिला महाविद्यालय भोड़िया खेड़ा
कुल सीटें - 40
इस वर्ष हुए दाखिले - 24
पिछले साल हुए दाखिले - 37
-
राजकीय महाविद्यालय भूना
कुल सीटें - 60
इस वर्ष हुए दाखिले - 59
पिछले साल हुए दाखिले - 52

राजकीय महिला महाविद्यालय रतिया
कुल सीटें - 60
इस वर्ष हुए दाखिले - 32
पिछले साल हुए दाखिले - 45

हिंदी को सीधा रोजगार से जोड़ा जाना चाहिए तभी इसके प्रति रुझान बढ़ेगा। हिंदी राष्ट्रीय भाषा है, इसलिए इसको लेकर गंभीर होकर इसके महत्व को समझना चाहिए। अगर इसमें रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो छात्रों का रुझान भी बढ़ता चला जाएगा।
-डॉ.सुरेंद्र ज्याणी, प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय भूना

सरकारी कार्यालयों में पत्राचार हिंदी में होना चाहिए। लेकिन हालात ये है कि हिंदी बोलने में भी संकोच किया जा रहा है। हमें हिंदी पर गर्व करना चाहिए। हिंदी को रोजमर्रा में प्रयोग करना चाहिए।
-डॉ. रमेश कुमार, सहायक प्रोफेसर हिंदी, राजकीय महिला महाविद्यालय भोड़िया खेड़ा

हिंदी को तकनीकी भाषा के रूप में प्रयोग करना होगा। कंप्यूटर आदि में हिंदी का प्रयोग होना चाहिए। छात्रों का साहित्य की तरफ रुझान किया जाए तो हिंदी का महत्व समझ आएगा।
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- डॉ.सुरेंद्र शर्मा, प्राध्यापक हिंदी, राजकीय महिला महाविद्यालय रतिया
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