टोहाना क्षेत्र के खेत में फसल अवशेष में लगी आग बुझाते कर्मचारी।
फतेहाबाद। पराली प्रबंधन को लेकर कृषि विभाग और प्रशासन के लाख समझाने के बावजूद जिले में धान की फसल के अवशेष जलाने के मामले कम नहीं हो रहे हैं। 15 सितंबर के बाद अब तक जिले में हरसेक की ओर से 31 फायर लोकेशन भेजी जा चुकी है। इनमें से 25 स्थानों पर धान की फसल के अवशेष जलाए जाने की सूचना सही मिली है।
अवशेष जलाने के सबसे ज्यादा मामले रतिया खंड में आए हैं। फसल अवशेष जलने से जिले की हवा भी खराब होने लगी है। जिले में एक्यूआई 134 तक पहुंच गया है, जो संतोषजनक स्थिति नहीं है। डीसी मनदीप कौर ने अधिकारियों को पराली जलाने पर नियंत्रण लगाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी किसान पराली में आगजनी करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई
की जाएगी।
पिछले साल से कम जल रहे फसल अवशेष : जिले में धान की फसल के अवशेष जलाए जाने के मामलों में पिछले साल की तुलना में इस बार काफी कम मामले सामने आए हैं। पिछले साल 15 अक्तूबर तक जिले में फसल अवशेष जलने के 80 मामले सामने आए थे।
वहीं, इस साल अभी तक 31 मामले सामने आए हैं। इसमें से 25 किसानों पर कृषि विभाग द्वारा 37500 का जुर्माना लगाया गया है। फसल अवशेष जलाने को लेकर तकनीकी सहायक राजपाल ने बताया कि फसल अवशेषों को आग लगाने से खेतों की जमीन खराब हो रही है। इससे न केवल जमीन में रहने वाले मित्र कीट खत्म हो जाते हैं, बल्कि पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं।
ऐसे में फसल अवशेष न जलाकर सुपर सीडर की मदद से फसल अवशेषों के प्रबंधन के साथ गेहूं की बिजाई कर सकता है। इसकी मदद से फसल अवशेष पूरी तरह मिट्टी में मिल जाते हैं, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति में भी इजाफा होता है। वहीं फसल अवशेष को जल्दी गलाने के लिए किसान यूरिया खाद का छिड़काव कर सकते हैं।