भट्टूकलां। अग्रवाल धर्मशाला में साध्वी सुजाता ने नानी बाई रो मायरो सुनाते हुए श्रद्धालुओं से कहा कि द्वापर युग में कंस के आतंक से त्रस्त धरती मां की पुकार पर यादव कुल में कृष्ण के रूप में भगवान के अवतरण का वर्णन आध्यात्मिक व व्यावहारिक लीलाओं के साथ किया। वर्तमान समय में आज घर-घर कंस पैदा हो चुके हैं, जिससे आंतकवाद, दुराचार, भ्रष्टाचार, पापाचार बढ़ गया है। जिसका परिणाम आज मानव समाज खंड-खंड होकर बहुत व्यथित है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हम सब भक्ति करते हैं, लेकिन जब तक पूर्ण सद्गुरु की शरण हमें नही मिलेगी, हम भक्त नहीं बन पाएंगे। इस कथा का मुख्य उद्देश्य समाज को भक्ति से जोड़कर सुदृढ, सम्पन, समर्पित, संगठित समाज बनाना है। उन्होंने कहा की आध्यात्मिक प्रवचन सत्संग में बच्चों सहित आना चाहिए। क्योंकि बच्चे हमारा भविष्य है। समस्त समाज को भारतीय संस्कारों से जोड़कर भारत को विश्व गुरु बनाना है। आयोजकों ने भक्तों को प्रसाद भी बांटा।
इस अवसर पर स्वामी चंद्रदेव, राज कृष्णा सिंघल दिल्ली, अनिल कुमार सिरसा, पुरुषोत्तम बंसल, राकेश बंसल, कृष्ण सिंगला, वेद प्रकाश बंसल, नवल किशोर दिल्ली, छोटू सोनी, बजरंग शर्मा, चंद्रभान शर्मा, आनंद गर्ग, सुशील कुमार, सरोज, उषा, रीतू, ज्योति, पुष्पा, पूजा, बिमला सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।