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Fatehabad News: ऐतिहासिक कर्ण कोट टीले में मिली नदी की मिट्टी से बनी दीवार

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भूना के गांव भट्टू के कर्ण कोट टीले पर उभरी नदी से बनी दीवार। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। भूना के गांव भट्टू में स्थित ऐतिहासिक कर्ण कोट टीले के साथ एक औैर उपलब्धि जुड़ गई है। इस टीले की साइट पर वैदिक काल से संबंधित दीवार मिली है, जिसका निर्माण नदी की मिट्टी से हुआ है। इससे यह जाहिर होता है कि किसी समय यहां पर सरस्वती नदी का प्रवाह था। यह टीला इसी नदी के तट पर बनाया गया था। पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक बुनानी भट्टाचार्य ने भी इसकी पुष्टि की है। वहीं, जल्द ही पुरातत्व विभाग की टीम इस टीले का दौरा करेगी।
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फतेहाबाद जिला विश्व पटल पर उस समय आया था, जब जिले के गांव कुनाल व बनावाली में हड़प्पा सभ्यता के अवशेष मिले थे। गांव भिरड़ाना में भी हाकड़ा सभ्यता के अवशेष मिले और यहां पर भी पुरातत्व विभाग ने खोदाई की। अब इसी तर्ज पर भूना का गांव भट्टू भी पौराणिक महत्व की वस्तुुएं मिलने केे चलते पुरातत्व विभाग की नजरों में आ रहा है। यहां के कर्ण कोट टीले से कई ऐतिहासिक वस्तुएं मिल चुकी हैं।
मुगलिया सल्तनत की तलवारों के अलावा यहां पर ब्रिटिशकाल के गोले तक मिल चुके हैं। इसके अलावा महाभारत कालीन सामग्री भी यहां पर मिल चुकी है। पुरातत्व विभाग ने हाल ही में इस साइट के आठ एकड़ क्षेत्र को अपनेे संरक्षण में लेने के लिए कार्य आरंभ कर दिया है। इस जमीन की निशानदेही भी हो चुकी है। जल्द ही यहां पर फेंसिंग करवाकर इस साइट को पुरातत्व विभाग अपने कब्जे में ले लेगा। संवाद
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गांव के शोधकर्ता ने ढूंढी दीवार
हालांकि यह साइट अभी पूरी तरह सेे पुरातत्व विभाग के संरक्षण में नहीं है औैर यहां पर किसान खेती कर रहे हैं। दो दिन पहले जब गांव के किसान रिछपाल अपने खेत में सरसों को पानी देे रहे थे, तो यहां पर एक दीवार देखी। उसने तुरंत इसकी जानकारी इस टीले पर शोध कर रहे गांव के अजय कुमार को दी। अजय कुमार के अनुसार इस दीवार को बनाने में जो सामग्री प्रयोग की गई है, वह नदी की मिट्टी से बनी है। यह दीवार करीब 3500 साल पुरानी बताई जा रही है। इस दीवार केे मिलने से यह साफ हो गया है कि कभी सरस्वती नदी का प्रवाह यहां पर था और कर्ण कोट टीले पर भी कोई सभ्यता रही होगी।
पुरातत्व विभाग कुनाल के बाद शुरू करेगा खुदाई
पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक बुनानी भट्टाचार्य के अनुसार अभी फतेहाबाद के कुनाल में खोदाई का काम पूरा करना है। कर्ण कोट टीले को संरक्षण में लेने का कार्य आरंभ कर दिया गया है और यहां पर फेंसिंग की जाएगी। कर्ण कोट टीले पर खोदाई के लिए उच्चतर विभाग को पत्र लिखा गया है। मंजूरी मिलने के बाद यहां पर भी खोदाई का कार्य आरंभ होगा।
कोट
गांव के कर्ण कोट टीले से अक्सर पौराणिक महत्व के अवशेष मिलतेे रहते हैं। हाल ही में यहां पर एक दीवार मिली है, जो नदी की मिट्टी से बनी है। वैदिक काल में लोग इसी प्रकार नदी की मिट्टी का प्रयोग करके दीवारें व घर बनाते थे। इस टीले की अगर खोदाई की जाए तो यहां पर पौराणिक महत्व की अनेक वस्तुएं मिल सकती हैं। और जो इतिहास इस टीले से बाहर आकर देश से रूबरू होना जाता है, वह पूरा हो सकता है।
-अजय कुमार, शोधकर्ता, कर्ण कोट टीला।
कोट
गांव भट्टू के कर्ण कोट टीले से दीवार निकली है, जोकि वैदिक काल की लगती है। इस बारेे में गांव केे शोधकर्ता अजय नेे मुझे फोटो भी भेजा है। यह दीवार करीब 3500 साल पुरानी और नदी की मिट्टी से बनी लगती है। इससे जाहिर है कि यहां पर सरस्वती नदी का प्रवाह था। जल्द ही साइट का निरीक्षण किया जाएगा और इसे पुरातत्व विभाग के संरक्षण में लेने की सभी तैयारियां भी पूरी हो गई हैं।
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-बुनानी भट्टाचार्य, उपनिदेशक, पुरातत्व विभाग, हरियाणा।
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