भूना। शुक्रवार व शनिवार को लगातार करीब 15 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने बाढ़ के हालात पैदा कर दिए। शहर की कोई ऐसी सड़क और गली नहीं बची, जहां बरसाती पानी जमा न हुआ हो। गांवों में भी खूब पानी भर गया है। शहर की पॉश कॉलोनियों सहित बाहरी कॉलोनियों में बारिश का पानी तीन से लेकर पांच फुट तक जमा हो गया।
शहर में पानी की निकासी व्यवस्था की बदहाल स्थिति के चलते भूना में 60 फीसदी मकान व दुकान में कई फुट जलभराव होने से लाखों रुपये का सामान बर्बाद हो गया। दस मकान बारिश के कारण ध्वस्त हो गए और दर्जनों में दरारें आ गई। मॉडल टाउन में निचली रिहायशी एरिया के मकान पानी से लबालब हो गए हैं और झुग्गी-झोपड़ियां पानी से भरी पड़ी हैं। शहर की सामाजिक संस्थाओं ने धर्मशालाओं एवं अन्य सुरक्षित जगहों पर शरण देकर उन्हें जलपान व भोजन ग्रहण कराया।
ये क्षेत्र जलभराव से हैं प्रभावित
खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय में जलभराव होने के कारण कार्यालय में अधिकतर समान नष्ट हो गया है। इंजीनियरिंग विंग ऑफिस व मनरेगा ऑफिस तथा ग्राम सचिवों के रूम में बारिश के पानी की वजह से रिकॉर्ड बड़ी संख्या में खराब हो गया है। मनरेगा ऑफिस में मस्टररोल, एमबी सहित कई अति महत्वपूर्ण दस्तावेज भी शामिल हैं। कंप्यूटर व लैपटॉप और इलेक्ट्रिकल सामान खराब हो गया है। ढक्की मोहल्ला को छोड़कर शहर की अधिकतर कॉलोनियां जलमग्न हो चुकी हैं। इनमें गणेश कॉलोनी, मॉडल टाउन, टेलीफोन एक्सचेंज कॉलोनी, रामलीला ग्राउंड के पीछे की कॉलोनी, टोहाना रोड, मातूराम कॉलोनी, सैनी कॉलोनी, ऑफिसर कॉलोनी, लक्ष्मी अनाज मंडी, अग्रवाल कॉलोनी, गणेश धर्म कांटा एरिया, चंदननगर, श्याम विहार कॉलोनी, नेहरू पार्क एरिया, डिग्गी मोहल्ला, कंबोज मोहल्ला, पुराना बाजार, शहीद उधम सिंह चौक, हिसार रोड, उकलाना रोड व लीखा वॉच हाउस वाली गली, शहीद भगत सिंह मार्केट, शांति निकेतन स्कूल एरिया की कॉलोनी, बंसल कॉलोनी, प्रीति मैरिज पैलेस एरिया के पीछे की कॉलोनी पूरी तरह से जलभराव के संकट से जूझ रही है।
17 गांवों में जलभराव, फसलें भी हुई चौपट
शहर के अतिरिक्त गांव नाढोड़ी, धौलू, भूंदड़ा, रहनखेड़ी, कानीखेड़ी, टिब्बी, सिंथला, ढाणी डूल्ट, डूल्ट, लहरियां, बैजलपुर, दहमान, ढाणी गोपाल, नहला, गोरखपुर, जांडलीखुर्द, मोचीवाली में फसलें बारिश के पानी की भेंट चढ़ गई है। गांव में जलभराव के हालात होने के कारण बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। इनमें ज्यादा लहरियां व नाढोड़ी के ग्रामीण जल संकट से जूझ रहे हैं। उपरोक्त गांव में धान की फसल जमीन पर बिछ गई है और नरमे की फसल भी बर्बाद हो गई।
शहर में गंदे पानी की निकासी का नहीं है कोई स्थायी समाधान
भूना में नगर पालिका प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये विभिन्न प्रकार के टैक्स के रूप में लेने के बावजूद शहरवासियों को सुविधाएं देने में बिल्कुल नकारा साबित हुई है। गंदे पानी की निकासी की कोई भी योजना नहीं है। शहर का गंदा पानी आबादी के बीच तीन तालाबों में वर्षों से निर्भर है, लेकिन उपरोक्त तालाबों पर की नगरपालिका के अधिकारियों की लापरवाही और प्रतिनिधियों की वोट बैंक नीति के चलते काफी कब्जे हो चुके हैं। हालांकि वर्तमान में तालाब भी नाममात्र एरिया में बचे हैं। इसलिए गंदा पानी शहर की सड़कों व गलियों और मकानों तक आने का कारण भी यही है। शहर की सीवरेज सिस्टम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।
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डीसी ने जलभराव का लिया जायजा
उपायुक्त जगदीश शर्मा ने भूना में जलभराव के चलते रविवार को ट्रैक्टर पर सवार होकर कई कॉलोनियों का निरीक्षण किया। डीसी ने एसडीएम राजेश कुमार को दिशा निर्देश दिए कि पानी निकासी व्यवस्था को लेकर व्यापक स्तर पर प्रबंध किए जाएं। शहर से पानी निकालने के लिए यथाशीघ्र संबंधित अधिकारियों को साथ लेकर पानी निकालने का जो विकल्प है, उसे ढूंढकर और लोगों को राहत प्रदान करें। इस मौके पर सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता ओपी बिशनोई, मैकेनिकल एसडीओ एलपी जगलान, नायब तहसीलदार रणवीर सिंह घानिया, पटवारी सुरेश कुमार, ग्राम सचिव नरेंद्र सिंह कुंडू, नगरपालिका कनिष्ठ अभियंता राजेश कुमार भांभू व लेखाकार सुरेश कुमार शर्मा आदि मौजूद थे।