फतेहाबाद। सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में कमेटी द्वारा जांच पूरी करने के बाद अब एक बार फिर से जांच शुरू हो गई है। कमेटी ने जांच के दौरान 842 दिव्यांग प्रमाण पत्रों को रिकॉर्ड न मिलने के कारण संदिग्ध माना था। इन संदिग्ध प्रमाणपत्रों को लेकर तत्कालीन दो कंप्यूटर ऑपरेटरों में से एक सामने आया है।
तत्कालीन कर्मचारी रवि ने संदिग्ध प्रमाणपत्रों को लेकर कुछ रिकॉर्ड उपलब्ध करवाया है, जो कि कार्यालय में था। अब कमेटी को जो रिकॉर्ड मिला है, उसके साथ संदिग्ध प्रमाणपत्रों का मिलान किया जा रहा है। हालांकि सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। बता दें कि सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र का मामला सामने आने के बाद सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत ने छह डॉक्टरों की कमेटी बनाकर जांच शुरू करवाई। वर्ष 2018 से लेकर जुलाई 2022 तक रिकॉर्ड जांचा गया। कमेटी की रिपोर्ट मुताबिक जांच के दौरान 80 प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए और 842 संदिग्ध थे। जो प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए उसमें असेसमेंट शीट में प्रतिशत और प्रमाण पत्र में अलग-अलग मिली है। इसके अलावा हस्ताक्षरों का भी मिलान नहीं हुआ है। फर्जी प्रमाण पत्र सामने आने के बाद अभी तक मामले में संलिप्त कर्मचारी और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि कमेटी की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय भेजी गई है और मार्गदर्शन मांगा गया है।