डीसी कॉलोनी के निवासी इंद्रो देवी, राहुल शर्मा, रामंचद्र, सुरेश कुमार, प्रेम कुमार, रमेश कुमार सहित अन्य प्लॉटधारकों ने बताया कि कॉलोनी में प्लाॅटों को लेकर कागजातों उनके साथ धांधली बरती गई थी। 100 के करीब प्लाट धारकों के इंतकाल नहीं हो पा रहे हैं। इस मामले में तहसीलदार कार्यालय अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया है। इस मामले में डीसी कॉलोनी के लोगों ने मई में सीएम विंडो में शिकायत दर्ज करवाई थी, कि सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी के चलते उनके प्लाटों के इंतकाल दर्ज नहीं हो पा रहे हैं। इस पर तहसीलदार ने शिकायत को करीब 4 माह लटकाने के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा कि काम पुराना होने की वजह से 3 महीने का समय और लग सकता है और शिकायत को बंद करवा दिया। तहसीलदार द्वारा अपनी रिपोर्ट में यह साफ नहीं किया गया कि इस रिकॉर्ड को ठीक करने के लिए विभाग द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं और किन अधिकारी व कर्मचारियों की ड्यूटियां निर्धारित की गई है।
रिपोर्ट में तहसीलदार द्वारा निर्धारित समय के बीत जाने के बाद भी जब समाधान होता नहीं दिखा, तो कॉलोनी वासियों ने सीएम ऑफिस को इस बारे अवगत करवाया, इसके बाद सीएम ऑफिस द्वारा शिकायत को रिओपन कर दिया गया है। कॉलोनी वासियों का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा की गई है, जिस कारण असली प्लाट मालिकों के इंतकाल दर्ज नहीं हो पा रहे, तथा इंतकाल ऐेसे लोगों के नाम दर्ज हैं, जिनका इन प्लाटों से कोई लेना देना नहीं है। इसी वजह से बहुत से प्लाॅट मालिक अपने हितों से वंचित हो रहे हैं।
काबिले गौर है कि जिला प्रशासन को इस बात का पता होने के बावजूद तथा कॉलोनी वासियों द्वारा बार-बार गुहार लगाए जाने के बाद भी उनकी शिकायतों को दरकिनार करके इसे बंद करवा दिया जाता है और अधिकारियों द्वारा गोलमाल रिपोर्ट बना दी जाती है। कॉलोनी वासियों के अनुसार रिकॉर्ड ठीक करने का काम राजस्व विभाग का है, परंतु अधिकारी उन्हें कोर्ट जाने की सलाह दे रहे हैं, जो कि सरासर गलत है। उनका कहना है कि विभाग की गलतियों का खामियाजा जनता क्यों भुगतें।
वहीं, इस मामले में नायब तहसीलदार राजेश गर्ग से बात करने के लिए कई बार उनके मोबाइल पर कॉल की गई। मगर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
नजरसानी में गए इंतकाल अब तक नहीं पहुंचे तहसीलदार के पास
कॉलोनी वासियों ने बताया कि प्रशासन की लापरवाही का नमूना यह भी है कि तहसीलदार द्वारा अपनी रिपोर्ट में लिखा गया है कि वर्षों पहले जो इंतकाल नजरसानी किए गए थे, वो अभी तक तहसील कार्यालय में नहींं पहुंचे हैं, परंतु रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि इतने वर्षों तक रिकॉर्ड का तहसील कार्यालय में न पहुंचने का क्या कारण है, तथा इसका जिम्मेदार कौन है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
डीसी कॉलोनी में करीब 20 से 30 साल पहले से लोग काबिज हैं। यह जगह उन्होंने खरीदी तो रजिस्ट्री कर दी गई, लेकिन अब जब हम इंतकाल करवाने जाते हैं, तो जगह किसी अन्य व्यक्ति के नाम दिखाई जा रही है। सीएम विंडो में दोबारा शिकायत लगाने पर अब इसे दोबारा से री-ओपन करने के आदेश दिए गए हैं।
-राहुल शर्मा, निवासी, डीसी कॉलोनी