फतेहाबाद। अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण में उप वर्गीकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का एससी समाज के लोगों ने विरोध किया। अनुसूचित जाति के विभिन्न संगठनों ने बुधवार को लघु सचिवालय में विरोध प्रदर्शन कर उपायुक्त मनदीप कौर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
वहीं प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन द्वारा बुधवार सुबह 10 बजे ही शहर के सभी चौक, चौराहों पर पुलिस बल तैनात कर कड़ी निगरानी रखी गई। लघु सचिवालय स्थित आंबेडकर पार्क में लोगों को संबोधित करते हुए महासभा के जिला प्रधान रामफल ने कहा कि सरकार उप वर्गीकरण कर अनुसूचित जाति के लोगों को आपस में बांटना चाहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य में सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण का निर्णय आरक्षण ढांचे और संवैधानिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है। ऐसे में अनुसूचित जाति आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का विरोध किया जा रहा है।
डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और जन-जातियों को आरक्षण के मुद्दे पर फैसला सुनाते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और जनजातियों में सब-कैटेगरी बनाई जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्य संवैधानिक पीठ ने बहुमत से फैसला देते हुए ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य मामले में पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा 2004 सुनाए गए फैसले को खारिज कर दिया, जिसने कहा था कि इस आधार पर सब कैटेगरी में कोटे की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह एक समरूप वर्ग है।
वहीं डॉ. हेमराज ने बताया कि सरकार अनुसूचित जाति समाज में समानता लाना चाहती है तो बैकलॉग भरने के साथ-साथ नए पद सृजित करें। अगर सरकार वंचित अनुसूचित जाति समाज का भला करना चाहती है तो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की तर्ज पर सामान्य श्रेणी में अलग से प्रतिनिधित्व देना सुनिश्चित करें।
इस दौरान डॉ .विनोद घोटड, ओमप्रकाश पूर्व सरपंच, प्रवीन, नरेंद्र लुणा, सुभाष चौहान, प्रेम सिंह परिहार, रोहतास परिहार, अजय बोदीवाली, रामपाल बनावाली, हजरस के जिला प्रधान रमेश चालिया, जिला अध्यक्ष कर्मबीर लूणा, गुरु रविदास महासभा के प्रधान सुभाष कुमार और रामकुमार मेहुवाला सहित कई लोग मौजूद रहे।