फतेहाबाद। जिला परिषद कार्यालय में हुआ चेयरपर्सन व वाइस चेयरपर्सन चुनाव पूरी तरह पंचायत मंत्री देवेंद्र सिंह बबली बनाम गठबंधन हो गया। इस चुनाव में देवेंद्र बबली के खुलकर सामने आने के बावजूद जजपा संगठन ने उनको दरकिनार किया और गठबंधन धर्म का हवाला देकर भाजपा से हाथ मिला लिया।
एक ओर जहां बबली गुट चेयरपर्सन व वाइस चेयरमैन बनाने को शुक्रवार तक पूरी तरह से आश्वस्त था, वहीं शनिवार को अचानक बाजी पलट गई। नतीजा यह रहा कि बबली गुट के दोनों प्रत्याशियों को दो-दो मतों से हार का सामना करना पड़ा। मंत्री खेमा भी एकदम बनी परिस्थितियों से अनजान रहा और नतीजों ने हिलाकर रख दिया। बाद में मंत्री के भाई विनोद बबली आपा खो बैठे और गठबंधन गुट को जमकर भला-बुरा कहते रहे। संवाद
राजनीतिक गलियारों में चर्चा जजपा बना रही मंत्री से दूरी
उल्लेखनीय है कि इससे पहले पंचायत चुनाव के दौरान भाजपा व जजपा दोनों संगठनों ने अलग-अलग जिला परिषद व पंचायत समिति के उम्मीदवारों को जिताने के लिए पूरा जोर लगाया था। गठबंधन में होते हुए भी जजपा व भाजपा के पदाधिकारी एक-दूसरे से कन्नी काटते रहते थे, लेकिन जिला परिषद के चेयरपर्सन व वाइस चेयरमैन के चुनाव में दोनों धड़े एक साथ खड़े हो गए और मंत्री देवेंद्र बबली को अलग-थलग कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा है कि जजपा संगठन अपने ही मंत्री देवेंद्र बबली से दूरियां बना रहा है।
बेहतर मैनेजमेंट नहीं कर पाया मंत्री खेमा
जजपा के सूत्रों से पता चला है कि मंत्री देवेंद्र सिंह बबली ने जिला परिषद चेयरपर्सन और वाइस चेयरमैन बनाने के लिए जजपा संगठन के किसी भी प्रमुख पदाधिकारी से बातचीत नहीं की। मंत्री के भाई भी पार्षदों को अपने खेमे में लाने के प्रयास कर रहे थे। माना जा रहा था कि आठ जिला पार्षद मंत्री खेमे के पास हैं। मगर मंत्री का खेमा बेहतर मैनेजमेंट नहीं कर पाया। अति आत्मविश्वास के कारण जजपा पदाधिकारी ही उनसे नाराज हो गए। इसके खामियाजे के रूप में मंत्री खेमे को हार का सामना करना पड़ा।
मंत्री के भाई विनोद बबली बोले, चोर-लुटेरे एक हो गए
चुनाव परिणाम आने के बाद पंचायत मंत्री के भाई विनोद बबली काफी भड़के हुए नजर आए। उन्होंने तैश में आकर कह दिया कि चुनाव में छल, बल, दंड, भेद किया गया। अंदर और बाहर से काले, टोहाना से लेकर फतेहाबाद तक के चोर-उचक्के इकट्ठा हो गए। 23 जनवरी के कार्यक्रम में हम बिजी थे और इसी का फायदा उठाकर हमारे एक-दो भोले भाले जिला पार्षदों पर दबाव बनाया गया, जिस कारण हम लूज हो गए। उनकी बातों से साफ प्रतीत हो रहा था कि उनका निशाना अपने ही संगठन के लोगों पर था।
गढ़वाल का आरोप, पैसों के बल पर दीन-ईमान बेच गए पार्षद
इसके अलावा छह पार्षदों को जजपा के बैनर तले लाने में सफल रहे वार्ड नंबर सात के पार्षद रमेश उर्फ बंटी गढ़वाल भी चुनाव परिणाम के बाद आहत दिखाई दिए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि दिन-ईमान बेचकर चेयरपर्सन बनाई गई है। बहुत से ऐसे पार्षद हैं, जिन्होंने पैसों के बल पर अपना ईमान बेचा है। हमारे पास बहुमत था, लेकिन पैसों के खेल के आगे हम हार गए।
जिला परिषद कार्यालय में भी नहीं हुआ सौहार्दपूर्ण मिलन
चुनाव परिणाम के बाद जहां मंत्री देवेंद्र बबली मीडिया से बातचीत कर रहे थे, उसी समय जजपा के प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह, जिलाध्यक्ष सुरेंद्र लेगा, पंकज झाझड़ा भी पहुंचे। मगर किसी ने मंत्री से बातचीत करना उचित नहीं समझा और जिला परिषद कार्यालय के अंदर चले गए।