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सवा तीन लाख एकड़ धान के रकबे में से मात्र 93 हजार एकड़ जमीन पर ही बनी पराली की गांठें

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रतिया रोड पर गुरूद्वारा झाड़ साहिब के पास रखी गई परालियों की गांठें। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। जिले में इस बार धान की पराली जलाने के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि पिछले साल की अपेक्षा इस साल पराली जलानेे की घटनाएं कम हैं, लेकिन फिर भी आंकड़ा 600 के पार चल रहा है। वहीं, सवा तीन लाख एकड़ धान के रकबे में से मात्र 93 हजार एकड़ जमीन पर ही पराली की गांठें बन पाईं।
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पिछले साल आज तक जहां 853 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएं सामने आई थीं, वहीं इस साल अब तक 619 स्थानों पर पराली जलाई गई है। पिछले साल की बजाय, इस साल अब तक 19 हजार किसानों ने पोर्टल पर पराली प्रबंधन की प्रोत्साहन राशि के लिए आवेेदन किया है। पराली के बढ़ते केेसों को देखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. मुनीष नागपाल भी जिले में डेरा डाले हुए हैं।
फतेहाबाद जिले में नरमे का रकबा घटने की वजह से इस बार किसानों ने धान की रोपाई पर अधिक जोर दिया। जिले में इस बार तीन लाख 24 हजार एकड़ के रकबे पर धान की बिजाई हुई है। धान की फसल का रकबा बढ़ा, लेकिन जब कटाई का समय आया तो प्रशासन किसानों को पराली जलाने से नहीं रोक पाया। एक तो धान कटाई का समय लेट हुआ और इसके बाद गेहूं की बिजाई का सीजन शुरू हो गया। ऐसे में किसानों ने पराली प्रबंधन की बजाय पराली जलाने की घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया।
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बेलर की कमी भी रहा बड़ा कारण
जिले में तीन लाख 24 हजार एकड़ जमीन पर धान बिजाई की गई। प्रशासन के पास मात्र 190 बेलर ही उपलब्ध थे। छोटे बेलर एक दिन में मात्र 20 एकड़ और बड़े बेलर 40 एकड़ जमीन पर ही पराली की गांठें बना सकते थे। ऐसे में समय लंबा होता जा रहा है और किसानों ने अपनी पराली को आग लगाना शुरू कर दिया।
विशेष सचिव ने डाला जिले में डेरा
जिले में पराली जलने के बढ़ते केसों को देखते हुए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के विशेष सचिव डॉ. मुनीष नागपाल जिले में डेरा डाले हुए हैं। मंगलवार को उन्होंने गांव ढाणी बिजा लांबा में किसानों को सुपर सीडर चलाकर पराली प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकार की इन सीटू, एक्स-सीटू व इन-सीट विथ डी कंपोजर स्कीम के तहत 1000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि के लिए विभाग के पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है।
कोट
जिले में अब तक 93 हजार एकड़ जमीन पर पराली प्रबंधन करके गांठें बनाई गई हैं। पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है और आज ही के दिन जहां पिछले साल जहां 53 लोकेशन आई थी, वहीं मंगलवार को केवल तीन लोकेशन आई हैं। पराली प्रबंधन को लेकर पोर्टल पर 31 दिसंबर तक आवेदन किया जा सकता है, ताकि किसानों को पराली प्रबंधन पर एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा सके।
-पवन कुमार, सहायक कृषि अधिकारी, फतेहाबाद।
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जिला फतेहाबाद जो ग्राम पंचायत रेड जोन में है और वहां धान के बचे हुए फसल अवशेषों या पराली में कोई भी आगजनी की घटना नहीं होती है तो ऐसे गांव को रेड जोन से ग्रीन जोन में जाने पर जिलास्तरीय कार्यक्रम में उपायुक्त द्वारा उन्हें एक लाख रुपये, येलो जोन से ग्रीन जोन में आने वाली पंचायत को 50 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
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-डॉ.मनीष नागपाल, विशेष सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।
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