फतेहाबाद। एमबीबीएस छात्रों के लिए लागू की गई बॉन्ड पॉलिसी और सात साल की शर्त के विरोध में सोमवार को आईएमए के आह्वान पर निजी अस्पतालों में सुबह 8 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक ओपीडी बंद रही। अस्पताल संचालक 12 घंटे की हड़ताल पर रहे हालांकि अस्पताल में इमरजेंसी सेवाएं जारी रहीं।
आईएमए प्रधान डॉ.एचसी दहिया के नेतृत्व में आईएमए सदस्य लघुसचिवालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम अधिकारियों को ज्ञापन दिया। इस दौरान रोहतक पीजीआई में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों के परिजन भी पहुंचे और विरोध जताया। ओपीडी बंद रहने से सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण क्षेत्र से आए मरीजों को हुई। निजी अस्पताल में उपचार के लिए आए मरीजों को यहां पहुंचने पर ओपीडी बंद मिली और वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा कई मरीजों ने इमरजेंसी फीस कटवाकर डॉक्टर को दिखाया। बता दें कि निजी अस्पतालों में ओपीडी बंद रहने से मरीज उपचार लेने के लिए सरकारी अस्पताल में पहुंचे। आम दिनों की तुलना में ओपीडी 25 फीसदी ज्यादा रही। सोमवार को ओपीडी 650 से 700 के बीच रही। दोपहर 1 बजे तक सरकारी अस्पताल में ओपीडी पर्ची कटवाने के लिए लाइन लगी रही।
इस दौरान आईएमए सचिव डॉ. रिपुदमन, डॉ. सतीश बंसल, डॉ. मनमोहन पाहवा, डॉ. पवन मेहता, डॉ. पंकुश अरोड़ा, डॉ. दिनेश संदूजा, डॉ. राजेंद्र सोखी आदि मौजूद रहे।
डॉक्टर बोले- रोहतक पीजीआई में दाखिला नहीं ले रहे टॉपर बच्चे
आईएमए प्रधान डॉ.एचसी दहिया ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के छात्र 25 दिनों से हड़ताल पर हैं और सरकार से बातचीत के बाद कोई हल नहीं निकला है। उनके समर्थन में आईएमए एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर हैं। सरकार को सूझबूझ से काम लेना चाहिए। ये सभी की परेशानी है और आने वाले विद्यार्थियों के परिजनों के लिए भी बोझ है। किसी अन्य राज्य में ऐसा बॉन्ड नहीं है अगर है तो छोटा बॉन्ड है। सात साल की बंदिश दी गई है ऐसे में पीजी कब करेंगे, कैरियर में रोक है। सचिव डॉ. रिपुदमन ने कहा कि ये सभी बच्चे डॉक्टर परिवार के नहीं है, कई मिडिल श्रेणी के परिवार के भी बच्चे हैं। डॉ. सतीश बंसल ने कहा कि सरकार के पास नौकरी नहीं है, एमबीबीएस डॉक्टर बेरोजगार बैठे हैं। गरीब परिवार का बच्चा कैसे 40-45 लाख दे सकता है। रोहतक पीजीआई की मेरिट में बदलाव आया है। ऑल इंडिया सीट पर सिर्फ सात दाखिले हुए हैं। यहां के टॉपर बच्चे बाहर जा रहे हैं।
10 छात्र भी रोहतक पीजीआई में हड़ताल पर, परिजन बोले- कहां से देंगे इतनी राशि
वर्ष 2020 बैच से एमबीबीएस छात्रों के लिए बॉन्ड नियम लागू किया गया। जिले के करीब 10 छात्र रोहतक पीजीआई में पढ़ाई कर रहे हैं। सोमवार को उनके परिजन भी डीसी को ज्ञापन देने के लिए पहुंचे। फतेहाबाद निवासी प्रवीन कुमार ने बताया कि उसका बेटा कार्तिक रोहतक पीजीआई में पढ़ रहा है और 40 लाख बॅान्ड देने का दबाव है, वह कैसे दे सकते हैं। रामवर्मा ने बताया कि उसका बेटा वर्ष 2020 बैच का छात्र है। सरकार से अपील है कि इस तुगलकी फरमान को वापस ले।
इलाज के लिए आए मरीज हुए परेशान
कोट
सिवाच अस्पताल में उपचार के लिए आया था, लेकिन यहां पर आने के बाद पता चला कि हड़ताल है। उसकी टांग का यहां से उपचार चल रहा है।
-रवि मंडा, मरीज, निवासी किरढ़ान
फतेहाबाद के बत्रा अस्पताल में उसका उपचार चल रहा है। सोमवार को जब आया तो ओपीडी बंद मिली। अब उसे दोबारा आना होगा।
-रामसिंह, मरीज
फतेहाबाद के सिंगला अस्पताल में उपचार के लिए आई थी। दवाई खत्म है और सोमवार को डॉक्टर दिखाना था लेकिन नहीं मिला। अब उसे दोबारा आना होगा।
-कर्मजीत कौर, मरीज
फतेहाबाद में बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में ज्ञापन देने जाते हुए आईएमए सदस्य व एमबीबीएस कर रहे छात्रो?- फोटो : Fatehabad