नाइट स्वीपिंग मशीन पर अफसर मेहरबान, पार्षदों ने दो बार एजेंडा किया पास फिर भी नहीं हुई
फतेहाबाद। नाइट स्वीपिंग मशीन पर अफसर मेहरबान है, दो बार हुई हाउस की बैठक में पार्षद इसे बंद करने का प्रस्ताव पास कर चुके हैं। बावजूद इसके छह माह बाद भी नाइट स्वीपिंग मशीन बंद नहीं हो पाई है। पहली बैठक जुलाई माह में हुई थी और इसके बाद अक्टूबर माह में हुई। दोनों बैठकों में पार्षदों ने इसे फिजूलखर्ची बताकर बंद करने का प्रस्ताव पास किया था। पार्षद मशीन की सफाई से संतुष्ट नहीं हैं। नप प्रधान राजेंद्र सिंह खिंची का कहना है कि नाइट स्वीपिंग मशीन बंद करने की पावर डीएमसी के पास है।
वहीं ये भी बताया जा रहा है कि नाइट स्वीपिंग मशीन बंद नहीं होगी। अफसर एनजीटी के नियमों का हवाला देकर इसे बंद करने को तैयार नहीं हो सकते है। नगर परिषद नाइट स्वीपिंग मशीन को लेकर हर माह करीब साढ़े चार लाख रुपये भुगतान कर रहा है। यानि एक साल में करीब 54 लाख रुपये सिर्फ नाइट स्वीपिंग मशीन पर खर्च हो रहे है। इसके अलावा तेल खर्च अलग से है। करीब पौने दो साल से नाइट स्वीपिंग मशीन शहर की मुख्य सड़कों पर चल रही है।
मशीन पर रोजाना 50 लीटर डीजल खर्च हो रहा है
नाइट स्वीपिंग मशीन पर रोजाना होने वाले तेल खर्च को नगर परिषद द्वारा दिया जाता है। मशीन पर रोजाना करीब 50 लीटर डीजल खर्च होता है। पांच हजार रुपये का डीजल मशीन को चलाने पर खर्च हो रहा है। मशीन दो से तीन घंटे तक चलाई जाती है।
मशीन लाने के प्रस्ताव को पिछले हाउस ने किया था रद्द
नगर परिषद के पिछले हाउस में करीब तीन साल पहले नाइट स्वीपिंग मशीन को लाने का प्रस्ताव तत्कालीन ईओ जितेंद्र कुमार ने रखा था। लेकिन पार्षदों ने मना कर दिया था और इसे हाउस में रद्द कर दिया था। लेकिन डेढ़ साल बाद नगर निकाय ने मशीन भेज दी।
पार्षदों ने दो बार हाउस की बैठक में नाइट स्वीपिंग मशीन बंद करने का प्रस्ताव पास किया है। लेकिन अभी तक बंद नहीं की गई है। अधिकारी बंद क्यों नहीं कर रहे हैं इसका कारण नहीं पता। मशीन का हर माह साढ़े चार लाख का भुगतान हो रहा है।
- ज्योति मेहता, पार्षद
डीएमसी के पास है बंद करने की पावर :
नाइट स्वीपिंग मशीन बंद करने का प्रस्ताव पास करके जिला नगर आयुक्त के पास भेजा है। अब क्यों बंद नहीं की जा रही है, मुझे जानकारी नहीं है। डीएमसी के पास ही पावर है।
- राजेंद्र सिंह खिंची, प्रधान, नगर परिषद
अभी ये मामला मैने देखा नहीं है। प्रस्ताव पर नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रस्ताव देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- अजय चोपड़ा, डीएमसी