फतेहाबाद। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती के बेहतर जांच और उपचार को लेकर वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान की शुरूआत की गई थी। करीब 6 साल बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसमें फेरबदल किया है। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी पहचान को लेकर पीएमएसएमए यानी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को अब माह में एक दिन से बढ़ाकर तीन दिन कर दिया गया है। अब इस अभियान के तहत स्वास्थ्य केंद्रों में कैंप माह के 9, 10 और 23 तारीख को लगेगा।
पहले सिर्फ माह की 9 तारीख को ही अभियान के तहत कैंप लगाया जा रहा था। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केसों को चिह्नित करने के लिए इसे बढ़ाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो जिले में 15 फीसदी गर्भवती हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में शामिल होती है। कैंप में जांच बढ़ने पर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी केसों की ज्यादा पहचान हो सकेगी और समय से पहले उपचार शुरू हो पाएगा। संवाद
जिले के सात केंद्रों पर लगता है कैंप
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के सात केंद्रों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत कैंप लगाया जाता है। इसमें नागरिक अस्पताल अस्पताल फतेहाबाद, उप नागरिक अस्पताल टोहाना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रतिया, बड़ोपल, भट्टू, जाखल, भूना शामिल है।
जिले में अप्रैल से सितंबर माह तक हुई डिलिवरी
सरकारी अस्पतालों में हुई डिलिवरी : 3923
निजी अस्पतालों में हुई डिलिवरी : 3719
कैंप में गर्भवती के होते है सभी टेस्ट निशुल्क
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत स्वास्थ्य केंद्रों पर कैंप लगाया जाता है। यहां पर स्वास्थ्यकर्मी गर्भवती का रजिस्ट्रेशन करते है। यहां पर गर्भवती का वजन, ब्लड टेस्ट, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन जांच, युरिन टेस्ट व अल्ट्रासाउंड में किया जाता है। इसके अलावा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान की जाती है। गर्भवती में खून कम होना, जुड़वा बच्चा होना, नशीली दवाओं का सेवन करना, गर्भवती की कम या अधिक उम्र का होना, ब्लड प्रेशर बढ़ना आदि होना हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में शामिल होते हैं।
कोट
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत पहले माह में एक दिन कैंप लगता था जिसे बढ़ाकर तीन दिन कर दिया गया है। इसके पीछे मुख्य कारण ये ही है कि ज्यादा से ज्यादा हाई रिस्क प्रेग्नेंसी को चिह्नित किया जाए।
-डॉ. हमेश बंसल, उप सिविल सर्जन