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Fatehabad News: अब बाढ़ का पानी बना विवाद, किसानों और प्रशासन के बीच ठनी

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फतेहाबाद के माजारा रोड पर साइफन खोले जाने के बाद विरोध करते किसान।
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फतेहाबाद। फतेहाबाद के आसपास के इलाकों में फिलहाल बाढ़ का पानी ठहरा है। प्रशासन की ओर से इस पानी को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब पानी निकालने पर किसानों और प्रशासन के बीच ठन गई है। बुधवार को जब प्रशासन ने माजरा रोड कट पर साइफन खोलकर पानी शहर के चिल्ली झील वाले क्षेत्र में निकालने का प्रयास किया, तो किसानों ने इसका विरोध किया और साइफन को बंद करवा दिया। मौके पर डीएसपी जगदीश काजला भी मौके पर पहुंचे, लेकिन किसान अपनी बात पर अड़े रहे।
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फतेहाबाद में फोरलेन हाईवे के साथ बाढ़ का पानी अभी भी ठहरा हुआ है। पानी के ठहराव से अब यहां बदबू फैलने लगी है और लोग परेशान भी हो रहे हैं। इस बीच प्रशासन ने माजरा रोड पर साइफन को खोल दिया और बाढ़ का पानी चिल्ली झील की ओर छोड़ दिया। इसको लेकर माजरा रोड क्षेत्र के किसानों ने मौके पर पहुंचकर टीम का विरोध शुरू कर दिया और काम रुकवा दिया। पानी का ठहराव और जलनिकासी न होने के चलते प्रशासन खेतों के पानी को हाईवे के नीचे से साइफन खोलकर शहर के साथ लगती चिल्ली झील तक लाना चाहता है। चिल्ली पर बने और रंगोई से जुड़े बूस्टिंग स्टेशन से इसे रंगोई नाले में डाले जाने का प्लान है, जिसे किसानों ने फिलहाल रुकवा दिया है।
ज्ञात रहे कि फतेहाबाद के आसपास की ढाणियों व खेतों में आठ फुट तक पानी जमा हो गया था। पानी शहर की ओर ना जाए इसके लिए हाईवे पर प्रशासन ने बड़े बड़े बांध बना दिए थे, इसके बाद प्रयास यह हुआ कि ठहरे पानी को किसी भी प्रकार से खान मोहम्मद व हुडा सेक्टर के खाली पड़े क्षेत्रों में डाला जाए, लेकिन पानी निकलने के बजाय ठहर गया। अब बदबू भरे इस पानी को निकालने के लिए प्रशासन ने माजरा रोड का साइफन खोला तो इस क्षेत्र के किसान आगबबूला हो गए और साइफन बंद करवा दिया। हालांकि विवाद के बीच डीएसपी जगदीश काजला भी मौके पर पहुंचे, लेकिन किसानों ने उनकी एक न सुनी।
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किसान बोले- प्रकृति की मार से खेत पहले ही डूबे हैं, अब जान बूझकर नहीं डूबने देंगे

किसान हरविंद्र सिंह, गुरतेज ने बताया कि तीन-चार किलोमीटर व पांच हजार एकड़ में जमा पानी हाईवे और शहर के बीच आधा किलोमीटर की 500 एकड़ भूमि पर प्रशासन कैसे निकाल सकता है। उनका आरोप था कि जो खेत प्रकृति की मार से डूबे हैं, लेकिन अब जान बूझकर उनके खेत वे नहीं डूबने देंगे। इसलिए इस साइफन को नहीं खोला जाना चाहिए। किसानों ने आरोप लगाया कि पहले यही प्रशासन शहर की ओर आने वाले पानी को लेकर काफी मशक्कत करता रहा। जिन लोगों की फसलें बाढ़ के कारण खराब हुई, उसकी ओर ध्यान नहीं दिया गया और अब जो फसलें बच गई हैं, उसको भी डूबाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसको हम कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। किसानों ने बताया कि शहर की तरफ के खेत ज्यादा नीचे हैं, यदि पानी इधर निकाला गया तो यहां पांच से छह फुट पानी एकत्रित हो जाएगा और इसकी निकासी का कोई साधन भी नहीं है।
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