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Fatehabad News: तीन साल से उपभोक्ता फोरम में स्थायी अध्यक्ष नहीं, न्याय की आस में फरियादी

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फतेहाबाद। फतेहाबाद की जिला अदालत में पिछले तीन साल से उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष की स्थायी नियुक्ति न होने के कारण उपभोक्ता न्याय का इंतजार कर रहे हैं। जिला अदालत में उपभोक्ता फोरम तो है, लेकिन अध्यक्ष की स्थायी नियुक्ति न होने के कारण केस अभी भी पेंडिंग हैं और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
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भारत सरकार ने 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस घोषित किया है, क्योंकि भारत के राष्ट्रपति ने वर्ष 1986 में इसी दिन ऐतिहासिक उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अधिनियम को स्वीकारा था। इसके अतिरिक्त 15 मार्च को प्रत्येक वर्ष विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता हैं। राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस हमारे देश में 24 दिसंबर को मनाया जाता है। संवाद
उपभोक्ता फोरम में 500 से अधिक केस पेंडिंग
फतेहाबाद जिले में स्थित उपभोक्ता फोरम में पिछले तीन सालों से उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष की स्थायी नियुक्ति नहीं हो पाई है। यही कारण है कि उपभोक्ताओं को समय पर न्याय नहीं मिल रहा है। पहले दो साल कोरोना काल के निकल गए और कोई सुनवाई नहीं हो पाई। इस दौरान उपभोक्ता फोरम में केस तो बढ़े, लेकिन सुनवाई कम हुई। फिलहाल उपभोक्ता फोरम में 500 से अधिक केस पेंडिंग पड़े हैं और उपभोक्ताओं को न्याय की आस लगी हुई है। यहां यह भी गौरतलब है कि उपभोक्ता फोरम में अध्यक्ष के अलावा दो सदस्य होते हैं। इनमें अगर अध्यक्ष या एक सदस्य भी हो तो उपभोक्ता मामले की सुनवाई व निर्णय लिया जा सकता है, लेकिन बिना अध्यक्ष के निर्णय नहीं लिया जा सकता। फतेहाबाद में उपभोक्ता फोरम का अतिरिक्त कार्यभार सिरसा उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष के पास है और वह शुक्रवार को ही सुनवाई केे लिए आते हैं, जिस कारण उपभोक्ताओं की सुनवाई में लंबा समय लग रहा है।
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यह हैं उपभोक्ता को अधिकार
-यदि वस्तुओं अथवा सेवाओं का मूल्य और दावा की गई क्षतिपूर्ति, यदि कोई है, की राशि 20 लाख रुपये तक हो तो जिला उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया जा सकता है।
-यदि वस्तुओं अथवा सेवाओं का मूल्य और दावा की गई क्षतिपूर्ति, यदि कोई है, की राशि 20 लाख रुपये अधिक किंतु एक करोड़ रुपये से कम हो तो राज्य उपभोक्ता फोरम में याचिका दायर की जा सकती है।
-यदि वस्तुओं अथवा सेवाओं का मूल्य और दावा की गई क्षतिपूर्ति, यदि कोई है, की राशि एक करोड़ रुपये से अधिक हो तो राष्ट्रीय आयोग में शिकायत दायर की जा सकती है।
इन उपभोक्ताओं के केस हैं पेंडिंग
केस-एक
मैंने अपने खेत में एक कंपनी से पोली हाउस खरीदकर लगाया था। इसकी गारंटी थी, लेकिन यह समय रहते यह खराब हो गया। वकील के मार्फत मैंने कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में तीन साल पहले केस डाला था, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिला है।
-सुरेंद्र कुमार, निवासी गांव ढांड।
केस-दो
मैंने टेलर को सिलाई के लिए कपड़े दिए थे, लेकिन उसने मेरे कपड़े खराब कर दिए। इस बाबत मैंने 2019 में अपने वकील के मार्फत उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी, लेकिन अभी तक मैं न्याय के इंतजार में हूं।
-मुकेश कुमार, निवासी गांव एमपी सोतर।
केस-तीन
मेरे खेत में एक कंपनी के द्वारा पोली हाउस लगाया गया था। कंपनी ने दावा किया था कि यह खराब नहीं होगा, लेकिन कुछ दिन बाद ही पोली हाउस खराब हो गया। इसके लिए तीन साल पहले उपभोक्ता फोरम में संबंधित कंपनी केे खिलाफ शिकायत दी थी, अभी तक फैसला नहीं हो पाया है।
-रविकांत, निवासी गांव सालमखेड़ा।
कोट
उपभोक्ता फोरम में कई केस अभी भी पेंडिंग पड़ेे हैं। मैंने स्वयं कई केस लगा रखे हैं, लेकिन उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष की स्थायी नियुक्ति न होने के कारण लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पहले कोरोना के कारण केस नहीं लग पाए और अब स्थायी नियुक्ति न होने का इश्यूू बना हुआ है।
-अजय बेनीवाल, अधिवक्ता, जिला अदालत।
कोट
उपभोक्ता फोरम में अध्यक्ष का स्थायी पद न होने के कारण पेंडिंग केसों का अभी तक समाधान नहीं हो पा रहा है। तीन साल से 500 से अधिक केस पेंडिंग हैं, जिस कारण उपभोक्ताओं को भी परेशानी हो रही है और उनको समय पर न्याय नहीं मिल रहा।
-प्रदीप जांगड़ा, अधिवक्ता, जिला अदालत।
कोट
उपभोक्ता फोरम में अध्यक्ष की स्थायी नियुक्ति न होने के कारण उपभोक्ताओं को न्याय नहीं मिल रहा है। इस संबंध में सरकार को पत्र लिखा जाएगा, ताकि फोरम के अध्यक्ष की स्थायी नियुक्ति हो सके। इससे उपभोक्ताओं व अधिवक्ताओं को भी राहत मिलेगी और जिला बार एसोसिएशन इसके लिए काम करेगी।
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-नरेश सोनी, अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन।
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