फतेहाबाद। फतेहाबाद में लगातार पराली जलाने के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन जिले के कुछ किसान ऐसे भी हैं, जिन्होंने पराली प्रबंधन की ओर विशेष ध्यान दिया है। पिछले साल की अपेक्षा इस साल इन किसानों की संख्या बढ़ी है, जिससे पराली प्रबंधन के मामले में कुछ राहत तो मिली है। फिर भी फतेहाबाद अभी भी पूरे प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में नंबर वन बना हुआ है।
हरियाणा सरकार ने पराली प्रबंधन को लेकर वर्ष 2021 में योजना लांच करते हुए किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ एक हजार रुपये की राशि प्रोत्साहन के रूप में देने की घोषणा की थी। पहले साल यह राशि केवल उन्हीं किसानों को दी गई, जिन्होंने बेलर के माध्यम से अपने खेतों में पराली की गांठें बनवाई थी। वर्ष 2022 में सरकार ने इस योजना का दायरा बढ़ाया और जो किसान अपने खेतों में पराली को खेत की मिट्टी में ही डालेंगे, उनको भी इस योजना का लाभ मिलेगा। यानि हैप्पी सीडर के माध्यम से जो पराली खेत की जमीन में डाली जा रही है, उसके लिए भी किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
8006 किसान पात्र पाए गए
फतेहाबाद में वर्ष 2022 में 10 हजार 755 किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए कृषि विभाग के पास आवेदन किया था। बाद में जांच की गई तो 8006 किसान इसके पात्र पाए गए और उनको 8.39 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि सरकार की ओर से वितरित की गई। इस बार किसानों की संख्या बढ़ी है और 14 हजार 624 किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए अपना योगदान देने के लिए कृषि विभाग के पास आवेदन किया है। फिलहाल धान कटाई का सीजन जारी है और सीजन समाप्त होने के बाद कृषि विभाग की ओर से इसकी वेरिफिकेशन की जाएगी और इसके बाद किसानों के खातों में रुपये आ जाएंगे।
जिले में 259 में से 246 गांवों में होती है धान की फसल
फतेहाबाद जिले में 259 गांव पड़ते हैं, जिनमें 246 गांवों में धान की फसल की पैदावार होती है। इन गांवों में 3.37 एकड़ जमीन पर धान की रोपाई होती है। कृषि विभाग हालांकि हर साल किसानों को जागरूक करने में लगा रहता है, लेकिन गेहूं बिजाई की जल्दी में किसान धान के अवशेष जलाने में हिचक नहीं रखते हैं। लेकिन पिछले साल की अपेक्षा इस साल किसानों में कुछ जागरूकता आई है और पिछले साल की अपेक्षा इस साल चार हजार के करीब किसानों ने फसल प्रबंधन की ओर ध्यान दिया है।
पिछले साल के बजाय इस साल किसानों ने पराली प्रबंधन की ओर रुचि दिखाई है। पिछले साल जहां 10 हजार 755 किसानों ने आवेदन किया था, इस बार 14 हजार 624 किसानों ने पराली प्रबंधन के लिए आवेदन किया है। किसानों के लिए बेलरों व सुपर सीडर मशीनों की कोई कमी नहीं है।
-पवन कुमार, सहायक कृषि अभियंता, फतेहाबाद