सिरसा। पिछले 14 साल से मानसून लगातार जिले में किसानों को दगा दे रहा है। राजस्थान सीमा के साथ लगते कई गांव ऐसे हैं, जो बारिश के पानी और ट्यूबवेलों पर ही निर्भर हैं। घटता जलस्तर और बारिश न होने के कारण किसानों को फसल उपजाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। पिछले 14 सालों का रिकॉर्ड देखा जाए तो मानसून के दौरान जिले में होने वाली अनुमानित बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया है। साल दर साल बारिश कम होती जा रही है।
जिले में चार लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि योग्य भूमि है, जबकि 20 हजार हेक्टेयर भूमि गैर कृषि योग्य है। सिरसा जिले के भू-भाग की बात करें तो इसकी सीमाएं राजस्थान व पंजाब के साथ लगती हैं। जिले के किसान मुख्य तौर पर गेहूं, सरसों, ग्वार, धान व नरमा की खेती करते हैं। राजस्थान सीमा से जुड़े गांवों में बागवानी व सब्जियाें की खेती भी होती है। राजस्थान सीमा के साथ लगता चोपटा व अन्य क्षेत्र बरानी है। यहां पर किसान फसलों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेलों व बारिश पर ही निर्भर रहते हैं।
सिरसा में मानसून सीजन में हर बार अच्छी बारिश की उम्मीद रहती है, लेकिन मानसून हर बार किसानों से दगा करके जाता है। पिछले 14 सालों के रिकॉर्ड की बात की जाए तो मानसून सीजन में सिरसा में होने वाली औसतन 253 एमएम बारिश के नजदीक का आंकड़ा आज तक नहीं छू पाया गया है। इस बार सिरसा में एक लाख 800 हेक्टेयर में नरमा व 1 लाख 40 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य है।
किसान बोले- भूमिगत जलस्तर काफी नीचे, नहरी सप्लाई भी पूरी नहीं मिलती
सिरसा जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर भूमि राजस्थान की सीमा से जुड़ी हुई है। नहरी पानी का प्रबंध यहां पर कम ही है। ऐसे में किसानों को सबसे अधिक मानसून की बारिश का इंतजार रहता है। जून में मानसून की आहट हो जाती है और प्री मानसून की बारिश के बाद किसान बिजाई का कार्य शुरू कर देते हैं। चोपटा के किसान हरिसिंह, कागदाना के किसान दिलबाग सिंह, शक्कर मंदौरी के किसान बलविंद्र सहारण ने बताया कि पहले अच्छी बारिश होती थी, लेकिन अब मानसून सीजन में बारिश काफी कम होती है। उन्होंने बताया कि भूमिगत जलस्तर भी काफी नीचे जा रहा है और नहरी पानी की पूरी सप्लाई भी नहीं मिलती। ट्यूबवेल के बाेर बार-बार करवाने पड़ रहे हैं। अच्छी बारिश मानसून में मिल जाए तो किसानों को काफी फायदा होगा।
मानसून में हुई बारिश का ब्यौरा
वर्ष- बारिश
2010- 222 एमएम
2011- 193 एमएम
2012- 120 एमएम
2013- 112 एमएम
2014- 90.0 एमएम
2015- 94.81 एमएम
2016- 98.06 एमएम
2017 - 56.73 एमएम
2018 - 93.79 एमएम
2019- 92.0 एमएम
2020- 86.48 एमएम
2021- 83.84 एमएम
2022- 114.09 एमएम
2023- 104.74एमएम
प्रदेश में अमूमन जुलाई माह में मानसून आता है। 31 मई तक केरल में मानसून दस्तक दे देगा। इस बार प्रदेश में मानसून की अच्छी बारिश होने की उम्मीद है। - डाॅ. मदन खीचड़, विभागाध्यक्ष मौसम विज्ञान विभाग, एचएयू हिसार।