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गड़बड़झाला : प्रॉपर्टी एनडीसी के 44 आवेदनों में दुकानदार ने डाला खुद का मोबाइल नंबर

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फतेहाबाद का नगर परिषद कार्यालय। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। नगर परिषद में प्रॉपर्टी की एनडीसी लेने और आईडी में आपत्तियों को ठीक करवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन के नाम पर कुछ दुकानदारों का गड़बड़ झाला सामने आया है। ऑनलाइन आवेदन करने वाले दुकानदार आवेदन के दौरान खुद के मोबाइल नंबर दर्ज कर रहे हैं और विकास शुल्क जमा करवाने के नाम पर अवैध वसूली कर रहे हैं। इसका खुलासा नगर परिषद कार्यालय में जांच के दौरान हुआ है।
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एनडीसी (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) के 44 आवेदन ऐसे मिले हैं जिसमें एक ही दुकानदार के मोबाइल नंबर दर्ज हैं। नगर परिषद अधिकारी अब संबंधित दुकानदार को नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहे हैं। मामले की जांच हो तो एनडीसी आवेदन और प्रॉपर्टी आईडी में आपत्ति दूर करने के नाम पर आवेदन को लेकर नप अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता है। आवेदन के दौरान विकास शुल्क की फीस के नाम पर अवैध राशि वसूलने की दुकानदारों के खिलाफ पहले भी शिकायत आई है लेकिन अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।
खुद के नंबर दर्ज कर मालिक को प्रॉपर्टी जानकारी से कर रहे वंचित
प्रॉपर्टी की खरीद व बेच के दौरान नो ड्यूज सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा प्रॉपर्टी आईडी जनरेट करवाने और उसमें आपत्ति को दूर करवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। ऑनलाइन आवेदन का नगर परिषद कार्यालय के पास कई दुकानदार काम कर रहे हैं। दुकानदार आवेदन ऑनलाइन करने के दौरान खुद का मोबाइल नंबर दर्ज कर रहे है, इससे प्रॉपर्टी मालिक को ये जानकारी नहीं मिल पाती कि वास्तविक विकास शुल्क कितना है और कितनी राशि बकाया है। इसका फायदा उठाते हुए दुकानदार विकास शुल्क की कई गुना राशि वसूल रहे और लोगों को रसीद भी नहीं दे रहे हैं।
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14 हजार शुल्क का वसूल लिए 90 हजार
ऑनलाइन आवेदन के नाम पर बड़े स्तर पर गड़बड़ झाला का खुलासा हुआ है। इसके बाद जांच शुरू हुई तो पता चला है कि 44 आवेदनों में एक ही दुकानदार ने अपने मोबाइल नंबर दर्ज कर दिए हैं। फतेहाबाद की हरिजन कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने नप अधिकारियों को शिकायत दी है कि उसने प्रॉपर्टी आईडी जनरेट करवाने के लिए नगर परिषद के पास स्थित एक दुकान पर गया। संबंधित दुकानदार ने रिहायशी दिखाने के लिए 20 हजार रुपये और कामर्शियल दिखाने के लिए 68 हजार रुपये मांगे। अगर पूरा काम करवाते हैं तो 22 हजार रुपये अलग से देने होंगे, इसमें से अधिकारियों को भी देने होते है, उसने 90 हजार रुपये दे दिए। जब वह तहसील में रजिस्ट्री करवाने के लिए गया तो वहां पर प्रॉपर्टी का नो ड्यूज फीस मांगी गई, जब वह संबंधित दुकानदार के पास गया तो उसने रसीद देने में आनाकानी की। जब उसने नप कार्यालय में जाकर रसीद निकलवाई तो पता चला कि 14 हजार 800 रुपये राशि भरी गई है। दुकानदार ने करीब 75 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर दी।
दुकानदार बोले- मालिक की मर्जी से डालते हैं नंबर
प्रॉपर्टी के नो ड्यूज सर्टिफिकेट के आवेदन में दुकानदार द्वारा खुद के मोबाइल नंबर डालने के मामले का खुलासा होने के बाद दुकानदार का कहना है कि प्रॉपर्टी मालिक की इच्छा से खुद के मोबाइल नंबर दर्ज किए जाते हैं।
प्रॉपटी मालिक का नंबर दर्ज होने से यह होगा फायदा
प्रॉपटी आईडी में मालिक का मोबाइल नंबर दर्ज होने से उसे नगर निकाय से संबंधित जानकारी मिलती रहेगी।
प्रॉपर्टी आईडी में अगर मालिक का मोबाइल नंबर दर्ज है तो उसे शुल्क को लेकर अपडेट मिलते रहेंगे।
पोर्टल पर आवेदन के दौरान अगर मालिक का मोबाइल नंबर दर्ज है तो उसे पता चलता रहेगा कि आवेदन का स्टेटस क्या है।
प्रॉपर्टी आईडी में मोबाइल नंबर दर्ज होने से संबंधित मालिक के पास ओटीपी जाएगा और उसे पता रहेगा कि आवेदन में क्या फेरबदल हो रहा है।
कोट
एनडीसी आवेदन को लेकर लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है वह पहले कार्यालय में आकर जानकारी ले सकते है। एक दुकानदार के खिलाफ शिकायत आई है, इस संबंध में संबंधित दुकानदार को नोटिस दे दिया गया है। पहले भी संबंधित दुकानदार को नोटिस दिया जा चुका है। लोगों को चाहिए कि वह आवेदन में खुद का मोबाइल नंबर दर्ज करवाएं ताकि उन्हें जानकारी मिलती रहे।
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-ऋषिकेश चौधरी, ईओ नगर परिषद
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